छत्तीसगढ़

विवाह के 7 साल बाद महिला को मिला मातृत्व सुख , दाई – दीदी क्लीनिक में हुआ मुफ्त में इलाज

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहर में एमएमयू वाहन मुहल्लों में जाकर मरीजों का इलाज करते हैं।

AINS RAIPUR…दाई – दीदी क्लीनिक में दो साल पहले विवाह के 5 सालों बाद भी मां नहीं बन पाने का गम बताया। इसके बाद चिकित्सकों ने कसरत और योग करने की सलाह दी। जिसका पालन कर बिना कोई खर्च के ही उसे मातृत्व सुख मिल गया।
मरीजों का इलाज उनके घरों तक जाकर देने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहर में एमएमयू वाहन मुहल्लों में जाकर मरीजों का इलाज करते हैं।

इन्हीं एमएमयू वाहनों में से एक वाहन को दाई – दीदी क्लीनिक का नाम दिया गया है। इस क्लीनिक में चिकित्सक समेत सभी स्टाफ महिलाएं ही रहती हैं। आज यही वाहन जरवाय स्थित बीएसयूपी कॉलोनी में पहुंची थी। इसी दौरान प्रेमलता साहू ( 27 वर्ष ) अपने 7 महीने के बच्चे आशीष का वजन करवाने पहुंची थी। उसने दाई – दीदी की टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हीं की मदद से विवाह के 7 साल बाद मातृत्व सुख मिला। उस समय वहां एमएमयू वाहनों के एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर काजल शर्मा भी मौजूद थी।

प्रेमलता ने बताया कि करीब 2 साल पहले उसने मातृत्व सुख नहीं मिल पाने का गम जताते हुए डॉक्टर दीदी से इलाज करने के लिए कहा था। तब चिकित्सक ने उसे उसका वजन कम करने कहा था। इसके लिए उन्होंने कसरत और योग करने की सलाह दी थी। प्रेमलता ने बताया कि डॉक्टर दीदी की हर गाइडलाइंस का उसने पालन किया और वह गर्भधारण कर मां बन गई। दो साल पहले की बातों को याद करते हुए एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर सुश्री शर्मा ने बताया कि गर्भ धारण के लिए प्रेमलता को किसी प्रकार की दवा नहीं दी गई थी। दाई- दीदी क्लीनिक पर महिलाओं को उनकी जरूरत के हिसाब से दवा देने के साथ ही मल्टी विटामिन भी दे दिया जाता है। प्रेमलता को भी उस समय मल्टीविटामिन दे दिया गया होगा।

एमएमयू वाहनों की माध्यम से लोगों का इलाज घर – घर पहुंचे इसकी मॉनिटरिंग महापौर एजाज ढेबर और निगमायुक्त प्रभात मलिक द्वारा नियमित की जाती है। इन वाहनों में मरीजों का ना सिर्फ इलाज किया जाता है, बल्कि दवाएं भी मुफ्त में दी जाती है। दाई – दीदी क्लीनिक महिलाओं के लिए बहुत ही कारगर साबित हुआ है। एक महिला को तो पता ही नहीं था कि उसे कैंसर है। क्लीनिक में आई तो उसे केंसर देखकर मेकाहारा जाने की सलाह दी गई। दो महीने पहले दलदल सिवनी निवासी टिकेश्वरी धीवर नामक महिला चक्कर आने की शिकायत लेकर पहुंची थी। उसके रक्त की जांच से उसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा मात्र 6 पायी गई। जिस वजह से उसे चक्कर आ रहा था। उसे हीमोग्लोबिन की दवा दी गई। जिससे दो महीने बाद उसकी हीमोग्लोबिन की मात्रा 10 हो गई और उसे चक्कर आने बन्द हो गए।

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