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34 वीं पुण्यतिथि पर विशेष…भारतीय फिल्मी दुनिया के पहले शो मेन कहे जाने वाले राज कपूर का राज करोड़ों लोगों के दिलों पर आज भी

"दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला, करके रहेगा कहने वाला"

AINS DESK…वैसे तो राज कपूर हमारे जन्म के पहले के कलाकार है जो हमारे दादाजी के समकालीन होंगे परंतु उनकी फिल्मों का प्रभाव आज भी हमारे सहित करोड़ों लोगों पर है। यूं कहे कि राज कपूर जी का राज करोड़ों लोगों के दिलों पर आज भी चलता है।
भारतीय फिल्मी दुनिया के पहले शो मेन कहे जाने वाले राज कपूर एक महान कलाकार, निर्माता निर्देशक तथा ऐसे फिल्मकार है जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता,अपनी कला एवं फिल्म निर्माण के माध्यम से भारतीय सिनेमा को अलग पहचान दी। हिंदी फिल्मों के महान कलाकार पृथ्वीराज कपूर के 6 पुत्र पुत्रियों में राज कपूर सबसे बड़े थे। उनका जन्म 14 दिसंबर सन 1924 को अविभाजित भारत में पेशावर में हुआ था। राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर ने पुणे 10 वर्ष की उम्र से ही फिल्मों में हिस्सा लेने को प्रेरित कर दिया था जिसके कारण वर्ष 1935 में राज कपूर को 11 साल की उम्र में फिल्म इंकलाब में बाल कलाकार के रूप में काम करने का मौका मिला।हमने से ऐसा कौन होगा जिसने उनकी अभिनीत फिल्म मेरा नाम जोकर, आवारा, श्री 420, बरसात, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है, आग, जागते रहो, बूट पॉलिश, तीसरी कसम,संगम, सहित अन्य फिल्में ना देखी होंगी। कौन ऐसा होगा जिसने उनकी फिल्म श्री 420 का यह गाना”प्यार हुआ इकरार हुआ फिर प्यार से क्यों डरता है दिल”ना गुनगुनाया होगा? किसे इस गाने के फिल्मांकन ने प्रभावित ना किया होगा?

“दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला, करके रहेगा कहने वाला”, किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है,मेरा नाम राजू घराना अनाम बहती है गंगा वहां मेरा धाम, जाने कहां गए वो दिन, कहते तेरी राह में नजरों को हम बिछाएंगे, छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब को मेरा सलाम, सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी, सच है दुनियावालों के हम हैं अनाड़ी, आ अब लौट चलें, ए भाई जरा देख के चलो आगे ही नहीं पीछे भी गीत जिसकी अंतिम लाइन पहला घंटा बचपन, दूसरा घंटा जवानी और तीसरा बुढ़ापा जैसे मर्मस्पर्शी शब्दों के साथ सजे अनगिनत गीत हैं जिसमें जीवन दर्शन छुपा है जिससे भारतीय समाज प्रेरित रहा है। यह गीत ऐसे गीत है जो जीवन को सच्चाई से जीने का संदेश देते हैं। इन गीतों को स्वर्गीय मुकेश जी ने आवाज दी और मुकेश जी की यह आवाज राज कपूर जी का पर्याय भारतीय समाज में बन चुकी थी। क्या कोई फिल्म तीसरी कसम का वह गीत सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है ना हाथी है ना घोड़ा है वहां पैदल ही जाना है को भूल सकता है?

सच पूछो तो मैंने राज कपूर की फिल्म पहली बार तीसरी कसम उनके निधन 2 जून 1988 की रात्रि में देखी थी। यह फिल्म उनके निधन की रात्रि दिल्ली दूरदर्शन से प्रसारित हुई थी। घर के बगल ने स्थित महुए के बड़े झाड़ के ऊपर टीवी का एंटीना पाइप के द्वारा लगा हुआ था जिसके थोड़ा हिलने पर टीवी झिलमिल आने लगता था। फिल्म को देखने के बाद राज कपूर की फिल्मों को देखने का चस्का लगा और एक एक कर उनकी ज्यादातर फिल्में हमने देख डाली है। यह तो उन फिल्मों की बात है जिसमें राज कपूर जी ने स्वयं अभिनय किया परंतु उन्होंने अपनी फिल्म प्रोडक्शन आरके बैनर के माध्यम से अनेक फिल्मों का निर्माण किया जिसमें से फिल्म बाबी, सत्यम शिवम सुंदरम, प्रेम रोग, राम तेरी गंगा मैली इत्यादि है जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी निर्माण क्षमता के साथ श्रेष्ठ हिंदी फिल्म संपादक होने का परिचय दिया। उनके मृत्यु उपरांत उनकी एक फिल्म हिना को उनके बेटों ने पूर्ण किया। यह सभी फिल्में रोमांटिक होने के बावजूद समाज को संदेश देने वाली फिल्में हैं।

अपनी कला क्षमता, श्रेष्ठ निर्देशन एवं निर्माण के कारण उन्हें अनेकों बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला। वर्ष 1971 में राज कपूर को भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण के पुरस्कार से अलंकृत किया गया। वर्ष 1987 मैं उन्हें भारतीय फिल्म संसार का सबसे श्रेष्ठ दादा साहब फाल्के पुरस्कार से अलंकृत किया गया और इसी पुरस्कार लेते समय उन्हें हार्टअटैक आने के कारण लीलावती हॉस्पिटल बांबे में भर्ती कराया गया जहां 2 जून 1988 को 63 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई।
भारतीय फिल्मी संसार के इस शो मेन का राज अपनी कला एवं फिल्मों के माध्यम से भारतीय जनमानस के करोड़ों करोड़ों लोगों के दिलों में चलता रहेगा।

अक्षय नामदेव पेंड्रा छत्तीसगढ़

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