छत्तीसगढ़

पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

बुधवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गलत शपथ पत्र पेश करने पर नाराजगी जताई और दो दिन के भीतर दोबारा शपथ पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।

बिलासपुर: जशपुर जिले के कुनकुरी पुलिस द्वारा एक परिवार को इतना प्रताड़ित किया जा रहा है कि उसे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। इस परिवार के दो सदस्यों ने अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कोर्ट के सामने गुहार लगाई है। पहली याचिका बेटी ने लगाई है। पिता और भाई को पुलिस जबरिया घर से उठाकर ले गई और जेल में डाल दिया। दूसरी याचिका पिता ने अपने बेटे की रिहाई के लिए लगाई है। पिता ने अपनी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया है कि बेटे को एक महीने पहले दुष्कर्म के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया है। आजतक पुलिस ने चालान पेश नहीं किया है। बेटा कहां है, सुरक्षित है भी या नहीं। पुलिस कुछ भी नहीं बता रही है। बीते सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य शासन को शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी पेश करने के निर्देश दिए थे। बुधवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गलत शपथ पत्र पेश करने पर नाराजगी जताई और दो दिन के भीतर दोबारा शपथ पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।

जिला जशपुर अंतर्गत कुनकुरी थाना पुलिस ने रफीक अली और उनके पुत्र को 17 मई की सुबह अकारण घर से उठा लिया। 18 मई रात तक दोनों के घर न पहुंचने पर बेटी ने थाने जाकर जानकारी लेनी चाही, पर उसे थाने से गिरफ्तारी का बिना कारण बताए भगा दिया

बेटी ने अधिवक्ता सैय्यद इशहादिल अली के माध्यम से बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दाखिल कर पिता और भाई को वापस पाने की मांग की। वेकेशन कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद शासन, आइजी, एसपी और थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र देने कहा था। एक महीने से ज्यादा समय से गुमशुदा बेटे को लेकर उसके पिता ने हाई कोर्ट में एक और नई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। इसमें कहा गया कि उसके बेटे को दुष्कर्म के एक मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पर आजतक उससे मिलने दिया गया और न ही उसका चालान कोर्ट में पेश किया गया। जब भी थाने जाते है तो उन्हंे भगा दिया जाता है। इसकी शिकायत एसपी जशपुर से भी की गई। पुलिस अधीक्षक ने भी उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया है

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