छत्तीसगढ़

भाजपा का आतंकवादियों से नाता है, यह रिश्ता क्या कहलाता है- पवन खेड़ा

उमेश कोल्हे की हत्या के कथित मास्टरमाइंड इरफान खान का निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा से संबंध हैं।

AINS RAIPUR…कांग्रेस पार्टी आतंकवाद पर राजनीति के पक्ष में कभी नहीं रही है। लेकिन आज जो हालात हैं और जिस तरह से एक के बाद एक घटनाओं में लगातार आतंकियों तथा अपराधियों के तार भाजपा से जुड़े मिले हैं वैसे में सवाल पूछना जरूरी हो जाता है। आप भी सोचिए और समझिए कि भाजपा राष्ट्रवाद की आड़ में देश के साथ कितना घिनौना खेल खेल रही हैं। यह बातें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने रायपुर में कही, पवन खेडा ने उदयपुर की घटना के आरोपियों के भाजपा से समबन्ध होने की बात भी कही,

पिछले दिनों उदयपुर में कन्हैया लाल जी की हत्या में शामिल एक आरोपी “मोहम्मद रियाज अत्तारी“ बीजेपी का कार्यकर्ता निकला। इसने बाकायदा बीजेपी के नेताओं की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ली थी।

मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि रियाज राजस्थान विधानसभा में बीजेपी के नेता और पूर्व मंत्री गुलाबचंद कटारिया के दामाद एवं पूर्व पार्षद अतुल चंडालिया की फैक्ट्री में काम कर चुका है। इसे भाजपा के कई कार्यक्रमों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ देखा गया है।

जम्मू-कश्मीर में ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों में से एक “तालिब हुसैन शाह“ भाजपा का पदाधिकारी निकला। इसकी बीजेपी के कई वरिष्ट नेताओं के साथ देश के गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी तस्वीर है। और जब ये पकड़ा गया तब पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे श्रद्धालुओं पर हमले की योजना बना रहा था।

मीडिया रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के कथित मास्टरमाइंड इरफान खान का निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा से संबंध हैं। और राणा दंपति का बीजेपी से क्या रिश्ता है ये किसी से छिपा नहीं है। इरफान खान राणा दंपति के लिए प्रचार करता था और वोट मांगता था।

वर्ष 2020 में जम्मू कश्मीर में आतंकियों को हथियार मुहैया कराने के आरोप में भाजपा के पूर्व नेता एवं सरपंच “तारिक़ अहमद मीर“ को गिरफ्तार किया गया था। तारिक़ अहमद पर हिजबुल कमांडर नवेद बाबू को हथियार देने का आरोप था जो आतंकियों की मदद करने वाले डीएसपी दविंदर सिंह के साथ गिरफ्तार हुआ था। एनआईए ने साफ तौर पर कहा भी था कि “तारिक़ अहमद मीर“ दविंदर सिंह का सहयोगी है। यदि दविंदर सिंह के मामले की ढंग से जांच होती तो सच्चाई का पता चलता लेकिन जांच बीच में ही रोक दी गई।

वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश में एटीएस की टीम ने अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश करते हुए आईएसआई के 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक बीजेपी आईटी सेल का सदस्य ध्रुव सक्सेना भी था जिसकी राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ तक तस्वीरें है।

इसके 2 साल बाद 2019 में मध्यप्रदेश में ही टेरर फंडिंग के आरोप में बजरंग दल के एक नेता “बलराम सिंह“ की गिरफ्तारी हुई थी।
वर्ष 2017 में असम के भाजपा नेता “निरंजन होजाई“ को एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकियों को आर्थिक मदद देने के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई। इन्हें एक हजार करोड़ के वित्तीय घोटाले एवं टेरर फंडिंग मामले में दोषी पाया गया था। इनकी फंडिंग से मिले पैसों से आतंकवादी हथियार आदि खरीदते थे जिसका इस्तेमाल देश की सेवा में लगे सुरक्षा बलों के खिलाफ होता था।

इतना ही नहीं बीजेपी सत्ता के लिए अपराध सिद्ध आतंकवादी को भी टिकट देने से नहीं चुकी है। इसी भारतीय जनता पार्टी ने मसूद अजहर के शागिर्द “मोहम्मद फारुख खान“ को स्थानीय चुनाव में श्रीनगर के वार्ड नंबर 33 से टिकट दिया था। जो जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट एवं हरकत उल मुजाहिदीन का सदस्य रह चुका है।
आतंकवादी मसूद अजहर को भी इसी बीजेपी की सरकार ने छोड़ा था जिसके बाद उसने देश में कई आतंकी वारदात को अंजाम दिया। पुलवामा में जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था वहां 200 किलो आरडीएक्स कैसे पहुंचा इसका जवाब अभी तक देश को नहीं मिला है। इसकी जांच अभी तक क्यों हुई ये भी एक सवाल है?
हम आप सभी से अपील करते हैं कि भाजपा के खोखले राष्ट्रवाद को पहचानिए। राष्ट्रवाद की आड़ में ये देश को खोखला करने का घिनौना खेल खेल रहे हैं।

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