अन्तराष्ट्रीय

अमेरिकी संसद के स्पीकर के ताइवान दौरे से चीन बौखलाया

उधर, ताइवान भी चीन की तरफ से होने वाली किसी भी प्रतिक्रिया का जवाब देने के लिए तैयार है.

ताईपे: अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर पेलोसी 24 लड़ाकू विमानों की निगहबानी में ताइवान पहुंचीं. उनके विमान को अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान पहुंच के बाद चीन आगबबूला हो गया है. दोनों देशों के बीच जंग जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है

दरअसल, अफगानिस्तान से आनन-फानन में निकलने के बाद बनी स्थिति और उसके बाद यूक्रेन और रूस में हो रही जंग के बीच अमेरिका चीन की धमकी लंबे समय से झेल रहे ताइवान के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए नेन्सी पेलोसी ताइवान की यात्रा पर हैं. ताइवान पहुंचने के बाद पेलोसी ने राष्ट्रपति साई इंग वेन से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट तौर पर बताना है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे नहीं हटेगा.

इधर पेलोसी की ताइवान यात्रा के मद्देनजर पहले अमेरिका को आग न खेलने की चेतावनी देने के बाद चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ताइवान जलडमरुमध्य में तीन दिन के सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है. उधर, ताइवान भी चीन की तरफ से होने वाली किसी भी प्रतिक्रिया का जवाब देने के लिए तैयार है. नागरिक जहाजों और विमानों को अभ्यास क्षेत्रों में प्रवेश करने से मना किया गया है.

इसके अलावा पेलोसी की ताइवान यात्रा से पहले चीन ने मंगलवार बिस्कुट और पेस्ट्री के 35 ताइवानी निर्यातकों से आयात को निलंबित कर दिया. हांगकांग सहित ताइवान और चीन के बीच बिस्कुट और पेस्ट्री महत्वपूर्ण व्यापारिक वस्तुएं हैं. ताइवान से 2021 में लगभग दो तिहाई निर्यात बिस्कुट और पेस्ट्री थे. ऐसा अनुमान है कि प्रतिबंध प्रभावी होने के बाद ताइवान में 100 से अधिक कंपनियां चीन के साथ व्यापार करना बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगी.

क्या है चीन और ताइवान का विवाद

ताइवान और चीन के बीच विवाद काफी पुराना है. 1949 में कम्यूनिस्ट पार्टी ने गृहयुद्ध था तब से दोनों हिस्से अपने आप को एक देश तो मानते हैं, लेकिन इस पर विवाद है कि राष्ट्रीय नेतृत्व कौन सी सरकार करेगी. दोनों के बीच अनबन की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद से हुई. उस समय चीन के मेनलैंड में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और कुओमितांग के बीच जंग चल रही थी. 1940 में माओ त्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट ने कुओमितांग पार्टी को हरा दिया. इसके कुओमितांग के लोग ताइवान आ गए. उसी साल चीन का नाम ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ और ताइवान का ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ पड़ा. चीन ताइवान को अपना प्रांत मानता है और उसका मानना है कि एक दिन ताइवान उसका हिस्सा बन जाएगा.

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