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जब ईसाई या इस्लाम धर्म कबूल तो, एसटी का लाभ क्यों ? धर्मांतरित लोगों को डी-लिस्ट किया जाए – आदिवासी समाज

ईसाई या इस्लाम धर्म कबूल चुके आदिवासियों को एसटी केटेगरी से बाहर करने के लिए राजधानी में रविवार को डिलिस्टिंग आंदोलन होने जा रहा हैं

AINS NEWS… प्रदेश में धर्मांतरण को रोकने आरएसएस ने नई मुहिम छेड़ी है। ईसाई या इस्लाम धर्म कबूल चुके आदिवासियों को एसटी केटेगरी से बाहर करने के लिए राजधानी में रविवार को डिलिस्टिंग आंदोलन होने जा रहा है। जनजाति सुरक्षा मंच की अगुवाई में हो रहे इस आंदोलन और महारैली में प्रदेश भर से आए जनजाति समाज के लोग जुटेंगे। यह रैली राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर के सामने होगा। मंच का मानना है कि जो जनजाति परंपरा को नहीं मानते उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उनको आदिवासी नहीं मानना चाहिए।

मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपने समुदाय की पहचान खो देता है तो वह अपनी मूल पहचान की रक्षा और उसे बनाए रखने के लिए दिए गए लाभों को उठाने के लिए कैसे पात्र हो सकता है ? समाज की मांग है कि जिन नागरिकों ने अपनी मूल संस्कृति और अपने मूल धर्म को छोड़कर विदेशी धर्म (ईसाई या इस्लाम) अपनाया उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से तत्काल बाहर किया जाए। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन किए जाए।

डी-लिस्टिंग के लिए संविधान संशोधन ही विकल्प है। आर्टिकल 341 में शिड्यूल कास्ट को परिभाषित किया गया है, दूसरा धर्म अपनाने वाले को एससी केटेगरी से बाहर करने का प्रावधान है। आर्टिकल 342 में अनुसूचित जनजाति को परिभाषित किया गया है। दूसरा धर्म अपनाने पर एसटी केटेगरी से बाहर करने का प्रावधान नहीं है। जनजाति सुरक्षा मंच इसमें बदलाव चाहता है।

जनजाति सुरक्षा मंच का मानना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासियों का धर्म परिवर्तन हुआ है। ये लोग मूल जनजातियों के हिस्से की सुविधाओं को अवैध रूप से छीन रहे हैं। इसमें आरक्षण भी एक तत्व है। छत्तीसगढ़ के जनजातियों के साथ ही देश के करोड़ो जनजातियों के साथ अन्याय हो रहा है। इसे रोकने के लिए धर्मांतरित लोगों को डी-लिस्ट किया जाए।

 

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