गरियाबंद

पीएम जनमन योजना में बड़ा घोटाला: गरियाबंद जिले में एक करोड़ से अधिक राशि के 9 आंगनबाड़ी केंद्र अधूरे, लेकिन 90% राशि का भुगतान

बिना कार्य पूर्ण किए ही ठेकेदार को लगभग 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया

AINS NEWS JIVAN S. SAHU गरियाबंद… केंद्र और राज्य सरकारें आदिवासी बहुल एवं विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, ताकि इन समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जा सके। लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत इन योजनाओं पर पलीता लगा रही है। ऐसा ही एक गंभीर मामला गरियाबंद जिले से सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत स्वीकृत 9 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में भारी गड़बड़ी और अनियमितता सामने आई है।

दो साल बीतने के बाद भी एक भी आंगनबाड़ी पूर्ण नहीं

जानकारी के अनुसार वर्ष 2024–25 में जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए 9 नए आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए थे। प्रत्येक केंद्र के निर्माण के लिए 11.69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी कार्यालय सहायक आयुक्त को दी गई। जब कि ये कार्य अन्य निर्माण एजेंसी या पंचायत को भी दिया का सकता था। इधर, समयावधि (3 माह) समाप्त होने के बावजूद एक भी आंगनबाड़ी केंद्र आज तक पूर्ण नहीं हो सका। 18 महीने बाद भी स्थिति यह है कि कई स्थानों पर प्लिंथ लेवल के बाद का कार्य नहीं हुआ तो कही थोड़ी बहुत दीवाल उठा रखी है। जिसके बाद से काम बंद है।

काम अधूरा, भुगतान पूरा

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि बिना कार्य पूर्ण किए ही ठेकेदार को लगभग 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया। यह भुगतान कथित रूप से संबंधित अधिकारियों के संरक्षण में किया गया। सूत्रो के मुताबिक विभाग के कर्मचारी ये भली भांति जानते थे कि ये नियम विरुद्ध भुगतान है, लेकिन प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत ने दबाव बनाकर राशि आहरण करवा दी। करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूरा दिखाया जा रहा है। अब सवाल उठता है की ठेकेदार और अधिकारी के बीच आपसी क्या बातचीत हुई की उन्होंने बिना कार्य पूर्ण किए ही भुगतान कर दिया। यह जांच का विषय है।

सूत्रों के अनुसार यह कार्य रायपुर निवासी योगेश बंसल को मिला हैं। क्रांति ट्रेडर्स और अजय राठौर नाम की दो फर्म के माध्यम से उन्होंने ये ठेका प्राप्त किया है। बताया जाता है कि योगेश बंसल का नाम इसमें हिडन है, वे सीधे तौर पर तो सामने नही है, लेकिन इस कार्य से जुड़े सभी कार्य के लिए वे खुद ही विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों से मिलते रहे।

आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आदिवासी और पिछड़ी जन जाति के बच्चों के विकास और शिक्षा के लिए बनी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट क्यों चढ़ाया गया?
बिना निर्माण पूर्ण हुए ठेकेदार को 90 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया, जबकि कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। जिला प्रशासन के संज्ञान में मामला होने के बाद भी अब तक जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। जो संदेह का कारण है।

जानकारी के मुताबिक ये आंगनबादी मैनपुर ब्लॉक में भाटडुमा, कोटखोझरी, खरसेपारा बनियापारा, गोलामाल सिहंगपारा-01, छोटेनवारा एवं कुहीमाल में बनने थे। इसी क्रम में ब्लॉक गरियाबंद में भेजराडीह उपपारा, ब्लॉक देवभोग में उरली नवापारा तथा ब्लॉक छुरा में कोकड़ीखोड़ा आंगनबाड़ी केंद्र में भवन निर्माण किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडे ने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत नव आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए कार्यालय सहायक आयुक्त को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया था। महिला बाल विकास विभाग ने मार्च से जून के बीच दो किस्तो में 11.69 लाख प्रति आंगनबाड़ी के हिसाब से 1 करोड़ 5 लाख की राशि भी हस्तारिंत कर दी। अभी तक एक भी आंगनबाड़ी पूर्ण नहीं हुए हैं ना ही विभाग को हैंड ओवर किया गया है।

बिना भवन पूर्ण हुए 90% भुगतान कैसे हुआ? किसके आदेश से भुगतान स्वीकृत किया गया? निरीक्षण रिपोर्ट किसने दी? इस संबंध में कार्यालय सहायक आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।

बॉक्स 02 बिना काम पूरा किए भुगतान कैसे लिया? कार्य अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ? काम करेंगे या नहीं यह जानने ठेकेदार योगेश बंसल से सम्पर्क करने पर कहा कि उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। प्रशासन से समय मांगा गया है।

 

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