जगदलपुर

उपभोक्ता आयोग ने खराब कार के लिए उपभोक्ता को पूरी राशि वापस करने दिया आदेश

कार की चमक फीकी भी नहीं पड़ी थी कि महज तीन दिनों के भीतर वाहन में 'बबलिंग' की समस्या आने लगी

AINS NEWS जगदलपुर… शहर की एक प्रमुख कार विक्रेता एजेंसी, जायका आटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड को ऐसी ही एक लापरवाही भारी पड़ गई है। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक फैसले में एजेंसी को खराब कार के लिए न केवल पूरी विक्रय राशि वापस करने, बल्कि उपभोक्ता को हर्जाना देने का भी आदेश दिया है। मामला शहर की निवासी मोनिका भूरा का है, जिन्होंने जायका आटोमोबाइल से एक नई ‘वेन्यू’ कार खरीदी थी। अभी कार की चमक फीकी भी नहीं पड़ी थी कि महज तीन दिनों के भीतर वाहन में ‘बबलिंग’ की समस्या आने लगी। भरोसा जताते हुए मोनिका ने कार को मरम्मत के लिए एजेंसी के पास भेजा। एजेंसी ने कई दिनों तक वाहन को अपने पास रखने का दावा किया और मरम्मत करने का आश्वासन दिया। समस्या तब खड़ी हुई जब मरम्मत के बाद भी कार में खराबी जस की तस रही। मोनिका द्वारा बार-बार पार्ट्स बदलने की मांग करने के बावजूद एजेंसी ने इसे नजरअंदाज किया और टाल-मटोल करती रही। लंबे समय तक परेशान होने के बाद, उपभोक्ता ने अपनी आवाज जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचाई।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष सुजाता जसवाल और सदस्य आलोक कुमार दुबे तथा सीमा गोलछा की खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी की। आयोग ने पाया कि एजेंसी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही कि उसने वाहन की उचित मरम्मत की थी या उसके पार्ट्स बदले गए थे। इसे सेवा में भारी कमी और व्यावसायिक कदाचरण माना गया। उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एजेंसी को वह वाहन वापस लेना होगा और उपभोक्ता को विक्रय राशि के रूप में लगभग 10 लाख रुपये लौटाने होंगे। इसके अतिरिक्त, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हुई मानसिक पीड़ा के लिए मोनिका भूरा को 10 हजार रुपये का हर्जाना भी कंपनी को देना होगा। यह फैसला उन वाहन विक्रेताओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो बिक्री के बाद उपभोक्ता की शिकायतों को हल्के में लेते हैं।
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एजेंसी को वह वाहन वापस लेना होगा और उपभोक्ता को विक्रय राशि के रूप में लगभग 10 लाख रुपये लौटाने होंगे। इसके अतिरिक्त, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हुई मानसिक पीड़ा के लिए मोनिका भूरा को 10 हजार रुपये का हर्जाना भी कंपनी को देना होगा। यह फैसला उन वाहन विक्रेताओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो बिक्री के बाद उपभोक्ता की शिकायतों को हल्के में लेते हैं।

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