तोड़गट्टा में आदिवासीओ का आंदोलन शुरू, दमकोढ़वाही खदान समेत छह खदान को बंद करने की अपील
ग्यारह मार्च से हजारों आदिवासीओ ने विभिन्न मांगो को लेकर आंदोलन का रुख अपना लिया है और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे है।

AINS KANKER…छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र से सटे सुरजागढ़ इलाके में स्थित तोड़गट्टा में आदिवासीओ का आंदोलन शुरू हो गया है। ग्यारह मार्च से हजारों आदिवासीओ ने विभिन्न मांगो को लेकर आंदोलन का रुख अपना लिया है और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे है। दरअसल सरकार दमकोढ़वाही समेत छह खदान स्वीकृत किये है जिसके विरोध में आदिवासीओ ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। रमेश डिबरा, रमेश झुग्गा,मंगेश देबू,कन्ना देबू,लक्ष्मण नवड़ी, प्रदीप हैड़ो,शंकर आत्राम,पत्तू पोटावी,सत्तू दरपत्ति समेत आंदोलनकारियो का कहना है कि दमकोड़वाही समेत प्रस्तावित छह खदानों को तत्काल बन्द किया जाए,साथ ही विकास के नाम पर आदिवासीओ को लूटने का आरोप सरकार पर लगाया है। साथ ही भाजपा को जन विरोधी बताते हुए सड़क निर्माण कार्य बंद करने की मांग भी की है। प्रदर्शनकारियो का कहना है कि बच्चो के बेहतर भविष्य के लिए स्कूलो में शिक्षक,बेहतर उपचार के लिए अस्पतालों में डॉक्टर समेत कई मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे है बावजूद इन तमाम मूलभूत सुविधाओं के प्रति सरकार ध्यान नही दे रही है।


खदाने खोलकर सरकार पेड़ पौधे कटवा रही है,पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है।जबकि आदिवासी ग्रामीण की आजीविका जंगल पर और प्राकृतिक चीजो पर निर्भर है।खदान खुलने से जंगल खत्म होने की स्थिति निर्मित होगी।सुरक्षा का हवाला देकर पुलिस कैम्प खोले जा रहे है।जबकि पुलिस कैम्प के जवान आदिवासी महिलाओ के साथ अत्याचार कर रहे है।ड्रोन भेजकर महिलाओ के निजता का हनन कर रहे है और अश्लील बर्ताव किये जा रहे है।साथ ही पुलिस कैम्प लोगो के सुरक्षा के बजाय खदानों की सुरक्षा के लिए खोले जा रहे है।वहीं दूसरी ओर सड़को का निर्माण विकास के लिए नही बल्कि खदानों से परिवहन सुगम हो सके इसलिए बनवाये जा रहे है सरकार यदि ग्रामीणों का विकास चाहती है तो ग्रामीणों को वें तमाम मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए जो ग्रामीण चाहते है।ग्रामीणों के रवैये से लगता है कि अब आन्दोलनकारी राशन पानी लेकर डंट चुके है और मांगे पूरी होते तक डंटे रहेंगे।




