भ्रष्ट शासन और भ्रष्ट प्रशासन, जिसमें भ्रष्टाचारी कर रहे मौज, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में चार करोड़ का घोटाला करने वाले लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकी सरकार
सुभाष मिश्रा एंड कंपनी के खिलाफ लोकायुक्त छत्तीसगढ़ भी अनुशंसा कर चुके हैं

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में सुभाष मिश्रा और उनके साथियों के खिलाफ 40/2013 अपराध दर्ज है।लोक अभियोजन स्वीकृति भी छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को मिल चुकी है। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की सरकार थी.


2018 तक डॉ रमन सिंह की सरकार रही लेकिन सुभाष मिश्रा की गिरफ्तारी नहीं करवा सकी क्यों ? यह सवाल हमेशा बना रहेगा. उसके बाद भूपेश बघेल की सरकार आयी नवम्बर 2023 तक भूपेश बघेल की सरकार रही वो भी छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में चार करोड़ का घोटाला करने वाले लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकी आखिर क्यों ?

माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार दिसंबर 2023 से है इस सरकार को भी एक वर्ष पूरा हो गया है।

सुभाष मिश्रा एंड कंपनी के खिलाफ लोकायुक्त छत्तीसगढ़ भी अनुशंसा कर चुके हैं 2019 में फिर भी सुभाष मिश्रा एंड कम्पनी की गिरफ्तारी का ना होना छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में भी भ्रष्टाचार होने के संकेत दे रहा है. माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव जी को इस प्रकरण पर ध्यान देना चाहिए। सुभाष मिश्रा एंड कम्पनी की तत्काल प्रभाव से गिरफ्तारी होनी चाहिए।




पत्रकार नारायण लाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ लोक आयोग व छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत की थी, जिसका प्रकरण लोक आयोग में प्रकरण क्रमांक 275/2012 है,
इसी तरह छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में प्रकरण क्रमांक 40/2013 दर्ज हुआ। इस अपराधिक प्रकरण की लोक आयोग ने कार्रवाई की अनुशंसा की और छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में उपरोक्त राशि का अवैध भुगतान होना पाया।


दर्ज अपराध क्रमांक 40/2013 के अनुसार कक्षा 3 और 4 के विविध विषयों के लिए एमजीएमएल कार्ड्स के मुद्रण का कार्य छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपा गया था। आरोपियों द्वारा प्रस्तुत निविदाओं में से category-wise L1 को निकालकर निविदा स्वीकृत कर दी गई और 7-10-2009 को छत्तीसगढ़ पैकेजर्स भिलाई को कार्यादेश क्रमांक 4408 तथा प्रबोध एंड कंपनी रायपुर को कार्यादेश क्रमांक 4410 जारी कर दिया गया।



कार्यादेश के अनुसार दोनों मुद्रकों ने डाई कटिंग का कार्य नहीं किया, बावजूद इसके दोनों मुद्रकों को डाई कटिंग मद के तीन करोड़ 61लाख 99 हजार 875 रुपए का अवैध भुगतान कर दिया गया। पूरे कार्य में दोनों मुद्रकों को 5 करोड़ 87 लाख 4 हजार 640 रुपये का कुल भुगतान किया गया जबकि उनकी वास्तविक भुगतान राशि 1 करोड़ 83 लाख 95 हजार 440 रुपये की थी, अधिक भुगतान की गई राशि में सेवा कर एवं टीडीएस भी शामिल है।
प्रकरण के अनुसंधान से यह प्रमाणित है कि इन लोकसेवक आरोपियों द्वारा दोनों मुद्रकों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। प्रकरण में आरोपी लोक सेवक जे. मिंज, तात्कालिक प्रबंध संचालक पाठ्यपुस्तक निगम, सुभाष मिश्रा तत्कालीन महाप्रबंधक पाठ्य पुस्तक निगम, संजय पिल्ले उप प्रबंधक मुद्रण तकनीशियन पाठ्य पुस्तक निगम, नंद गुप्ता , छत्तीसगढ़ पैकेजर्स प्राइवेट लिमिटेड और युगबोध अग्रवाल प्रबोध एंड कंपनी के विरुद्ध चालान क्रमांक 01/2018 तैयार किया जा चुका है, लेकिन फिर भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है, यह एक बड़े प्रश्न के रूप में सामने आ रहा है।


बहरहाल शिक्षा जैसे क्षेत्र में इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वाले सुभाष मिश्रा और उनके साथियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? शिकायतकर्ता नारायण लाल शर्मा ने कार्रवाई के लिए लोक आयोग की अनुशंसा को भी आधार बनाते हुए प्रकरण की जांच के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी पत्र लिखा था और जल्द से जल्द प्रकरण की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी।




