छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का कहर: रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी, बाढ़ का खतरा भी

मानसून की बारिश राज्य के लिए आफ़त बनकर बरस रही है।

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ से एक बड़ी और चिंताजनक ख़बर सामने आ रही है। मानसून की बारिश राज्य के लिए आफ़त बनकर बरस रही है। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलधार बारिश ने जन-जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के कई ज़िलों के लिए ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी कर दिया है, जिसके बाद भयंकर बाढ़ का ख़तरा मंडराने लगा है।

सबसे पहले बात करते हैं कि ज़मीनी हक़ीक़त क्या है। छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून ने काफ़ी ज़ोरदार तरीक़े से दस्तक दी है। लेकिन अब ये बारिश राहत से ज़्यादा आफ़त लगने लगी है। राज्य के उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के ज़िलों में स्थिति सबसे ज़्यादा गंभीर बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर ने 7 जुलाई 2025 के लिए जो अलर्ट जारी किया है, वो वाक़ई डराने वाला है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटे छत्तीसगढ़ के लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं। एक तरफ़ बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती परिसंचरण और दूसरी तरफ़ सक्रिय मानसून द्रोणिका, इन दोनों सिस्टम के कारण प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश का अनुमान है। ‘रेड अलर्ट’ का मतलब होता है कि इन इलाकों में 200 मिलीमीटर से भी ज़्यादा बारिश हो सकती है, जो भयानक बाढ़ और भूस्खलन का कारण बन सकती है। वहीं ‘ऑरेंज अलर्ट’ का मतलब है कि प्रशासन को किसी भी आपदा के लिए तैयार रहना होगा।

जिन ज़िलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, यानी जहाँ सबसे ज़्यादा ख़तरा है, वो हैं – बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, और मुंगेली।
इसके अलावा, जिन ज़िलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वे हैं – बेमेतरा, कबीरधाम, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, और बलरामपुर।
बात यहीं ख़त्म नहीं होती। राज्य के दक्षिणी और कुछ अन्य हिस्सों के लिए येलो अलर्ट भी है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, और जशपुर शामिल हैं। इन सभी ज़िलों में भारी बारिश के साथ-साथ तेज़ अंधड़ चलने, बिजली गिरने और मेघगर्जन की भी चेतावनी दी गई है।

अगर हम पिछले 24 घंटों के बारिश के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो वो चौंकाने वाले हैं। बलरामपुर में 427 मिलीमीटर, रायगढ़ में 417 मिमी, बीजापुर में 397 मिमी और बस्तर में 394 मिमी बारिश दर्ज की गई है। ये आंकड़े सामान्य से कई गुना ज़्यादा हैं।

जब इतनी बारिश होती है, तो सबसे पहला और सीधा ख़तरा बाढ़ का होता है। प्रदेश की छोटी-बड़ी कई नदियाँ और नाले उफान पर हैं। ख़ासतौर पर बिलासपुर से गुज़रने वाली अरपा नदी, कोरबा में हसदेव नदी, और महानदी का जलस्तर ख़तरे के निशान की तरफ़ बढ़ रहा है।

कई निचले इलाकों और बस्तियों में पानी भरने की ख़बरें आनी शुरू हो गई हैं। सड़कें तालाब बन गई हैं, जिससे यातायात ठप हो गया है। कई गाँवों का संपर्क ज़िला मुख्यालय से टूट गया है।

लेकिन इस आपदा के बीच प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद है। राज्य सरकार ने सभी ज़िलों के कलेक्टर्स को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। राहत और बचाव दल, यानी NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फ़ोर्स) और SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फ़ोर्स) की टीमों को सबसे संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है। ये टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों और दूसरे ज़रूरी उपकरणों के साथ तैयार हैं। कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मदद पहुँचाई जा सके।

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