गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित, राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध श्री सुरेश्वर महादेव पीठ और शिव मंदिर के बाहर लगा बोर्ड
त महासभा ने छत्तीसगढ़ के करीब 1 लाख 25 हजार मंदिरों में भी गैर-सनातनियों की एंट्री पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी

AINS NEWS… राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध श्री सुरेश्वर महादेव पीठ और शिव मंदिर के बाहर एक बोर्ड लगा दिया गया है, जिस पर स्पष्ट शब्दों में लिखा है- “गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित”. ये एक ऐसा फैसला है जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने और छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे धर्मांतरण के विरोध में लिया गया है. ये सिर्फ एक मंदिर की बात नहीं है. स्वामी राजेश्वरानंद महाराज के अनुसार, संत महासभा ने छत्तीसगढ़ के करीब 1 लाख 25 हजार मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है.
ये एक बहुत बड़ा ऐलान है. संत महासभा का तर्क है कि जब अन्य धर्मों के पवित्र स्थलों में दूसरे धर्म के लोगों का प्रवेश नियंत्रित या वर्जित होता है, तो हिंदू मंदिरों में ये नियम क्यों नहीं लागू हो सकता? उनका सीधा आरोप है कि धर्मांतरण की गतिविधियां हिंदू समाज को कमजोर कर रही हैं और इसे रोकने के लिए ये कड़े कदम उठाने जरूरी हैं.
संत महासभा के इस कदम को सिर्फ धार्मिक समर्थन ही नहीं, बल्कि वैचारिक समर्थन भी मिलता दिख रहा है. राम मंदिर के संस्थापक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक राजेंद्र प्रसाद ने संत महासभा के इस निर्णय का खुलकर समर्थन किया है.
रिपोर्ट के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि जो लोग मंदिर तोड़ने, भगवान की प्रतिमाओं को खंडित करने या उन्हें बम से उड़ाने की नीयत से आएंगे, तो समाज को यह निर्णय लेना ही होगा. उन्होंने पंडित धीरेंद्र शास्त्री की धर्मयात्रा और छत्तीसगढ़ में संत समाज के इस निर्णय को ‘जनभावनाओं के अनुरूप’ बताया है. इस बयान से साफ है कि इस मुद्दे को अब हिंदू धर्मस्थलों की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
हाल ही में छत्तीसगढ़ के मदकू द्वीप में छत्तीसगढ़ संत महासभा की एक बड़ी बैठक संपन्न हुई है. इस बैठक में देश को हिंदू राष्ट्र बनाने और धर्मांतरण के विरोध में बिगुल फूंका गया है. संत समाज अब सिर्फ मंदिरों में बोर्ड लगाकर ही नहीं रुकने वाला, बल्कि सड़क पर उतरने की भी तैयारी कर ली गई है.
योजना के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में एक बड़ी रैली निकाली जाएगी. इस रैली में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देशभर के संतों को शामिल होने का न्योता दिया जाएगा. इसके अलावा, संत समाज ‘घर-घर अभियान’ चलाकर इस मुद्दे पर जन समर्थन जुटाने का प्रयास करेगा.
ये पूरा घटनाक्रम पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छेड़ी गई ‘हिंदू राष्ट्र’ की बहस के समर्थन में एक बड़े ‘धर्मयुद्ध’ की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. छत्तीसगढ़, जिसे पौराणिक काल से ‘दक्षिण कोसल’ और ‘राम वन गमन पथ’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, आज वहीं से हिंदू राष्ट्र और धर्मांतरण के विरोध में एक ऐसी आवाज उठी है जो दूर तक जाने वाली है.
एक तरफ जहाँ संत महासभा इसे आस्था और धर्म की रक्षा के लिए जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ ये सवाल भी उठेगा कि क्या इस तरह के कदम समाज में दूरियां नहीं बढ़ाएंगे?
संत समाज का यह निर्णय छत्तीसगढ़ में क्या रुख लेता है, इस पर सरकार, प्रशासन और आम जनता की क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा.




