गरियाबंद

मोदी सरकार महंगाई रोकने में विफल, प्रदेश सचिव श्रीमती श्रध्दा ठाकुर

अपनी गृहस्थी के बजट को ठीक करने फिर से धुंए की ओर जा रही है महिलाएं

AINS NEWS… मोदी सरकार महंगाई रोकने में विफल है। उनके कार्यकाल के 13 साल में अनेक बार बेतहाशा एलपीजी गैस के दाम की वृद्धि हो गई है, जहां कांग्रेस की सरकार में 430 गैस के दाम थे तो भाजपा 5 रुपए भी वृद्धि होने पर चिल्ला-चिल्ला कर विरोध प्रदर्शन करती थी।

मोदी सरकार ने अपनी सरकार आने पर गैस के दाम कम करने की बात कही थी। 500 रुपए में गैस उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन आज तीसरी बार आने के बाद भी लगातार बेतहाशा वृद्धि हो रही है। कहीं न कहीं इसके लिए मोदी सरकार की आर्थिक नीति, व्यापार नीति, विदेश नीति, असफल होना है। आज महिलाएं फिर से चूल्हे की ओर जा रही है अपनी गृहस्थी के बजट को ठीक करने फिर से धुंए की ओर जा रही है। आज हर महिला परेशान है।

उन्होंने कहा कि एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की वृद्धि किए जाने से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। घरेलू उपयोग की आवश्यक वस्तु होने के कारण एलपीजी गैस हर परिवार की जरूरत है। कीमतों में इस प्रकार की बढ़ोतरी से विशेष रूप से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की रसोई का बजट प्रभावित होगा।

वर्तमान समय में पहले से ही महंगाई बढ़ रही है, ऐसे में गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की वृद्धि आम जनता के लिए चिंता का विषय है। आम लोगों की आय में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही है। सरकार से मांग की जाती है कि एलपीजी गैस की कीमतों में की गई इस वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाए और आम जनता को राहत देने उचित कदम उठाया जाए। साथ ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के हितों को ध्यान में रखते गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने की दिशा में ठोस नीति बनाई जाए। भाजपा सरकार की कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है।

आज भाजपा सरकार ट्रंप के इशारों में चल रहे हैं और इसी के चलते हमें पेट्रोलियम पदार्थ की कमी महसूस हो रही है। पेट्रोलियम खनिज मंत्री हरदीप पुरी जिनका नाम एप्सटीन फाइल में आया है, जो हर तरफसे असफल मंत्री है। आज तक न ही उनसे इस्तीफा लिया गया न ही ही उनकी जांच की जा रही है। इस देश का दुर्भाग्य है कि इस देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिला, जिन्होंने 13 साल में देश को 10 साल पीछे छोड़ दिया। आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक नीति याद आती है। जिनके कार्यकाल में भारत की जीडीपी दर 8 प्रतिशत हो गई थी। विदेश में भारत देश का डंका बज रहा था। आज हमने अपनी गरिमा खो दी और देश के आर्थिक नीति अस्त-व्यस्त हो चुकी है।

 

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