गरियाबंद

मालगांव में विशाल रक्तदान शिविर, निःशुल्क एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ

पूर्व नक्सलियों की भागीदारी ने दिया मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश

AINS NEWS… गरियाबंद के ग्राम पंचायत मालगांव में सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता की प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली, जहां विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर ग्रामीणों के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवा का भी शुभारंभ किया गया। इस सराहनीय पहल की अगुवाई समाजसेवी एवं जनपद सदस्य भीम निषाद ने की।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीणों, विशेषकर पिछड़ी जनजाति के लोगों को त्वरित और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। दूरस्थ अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए यह पहल ग्रामीणों के लिए राहत भरी साबित होगी। कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने रक्तदान शिविर में शामिल होकर मुख्यधारा से जुड़ने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। यह पहल समाज में विश्वास और समरसता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पूर्व नक्सली सुनील इस रक्तदान शिविर में अपने अन्य साथियों के साथ सेवाभाव में लगे हुए थे। मुख्यधारा में लौटने के बाद सभी पूर्व नक्सली समाज के बीच कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं, जो अब बदलती तस्वीर को बयां कर रही है। सुनील ने बताया कि सरेंडर करने के बाद उनकी पत्नी की तबियत अचानक खराब हो गई थी, उसे खून की जरूरत थी, तो उन्होंने समाजसेवी भीम निषाद से संपर्क किया, सही समय पर खून मिलने से आज उनकी पत्नी स्वस्थ्य हैं। उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम में शामिल होकर सेवा करने का अवसर मिला और कहा कि कभी भी किसी गरीब, जरूरतमंद को खून की आवश्यकता होगी तो वह भी रक्तदान जरूर करेंगे और उन्होंने सभी लोगों से भी रक्तदान करने की अपील की है।

बता दें कि इस आयोजन ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी है, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और नई सोच की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस शिविर में चम्पेश्वर ध्रुव की प्रेरणादायक कहानी भी सामने आई। 18 वर्ष की उम्र में बिजली कार्य के दौरान हुए हादसे में एक पैर खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अब तक 23 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों से इस पुनीत कार्य में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब उनके साथ हादसा हुआ और ढाई महीने से अस्पताल में चले इलाज के दौरान उन्हें जरूरत के समय रक्तदाताओं ने अपना खून देकर एक नया जीवनदान दिया, इसके बाद उन्होंने ठाना कि जब वह स्वस्थ हो जाएंगे तो जरूरतमंदों को मदद करेंगे। इसके बाद से वह ऐसे शिविरों के माध्यम से रक्तदान करते हुए आ रहे हैं।

 

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