छत्तीसगढ़

तीन पीढ़ियों से भगवान गणेश की जगह मां संतोषी को विराजित करने की अनूठी परंपरा

गणेश चतुर्थी पर 51 साल से विराजित होती हैं मां संतोषी

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव को यूं ही संस्कारधानी नहीं कहा जाता। यहां अलग-अलग पर्व और परंपराओं की अपनी अनूठी कहानी है। देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। राजनांदगांव में भी गणेश उत्सव की धूम है, लेकिन शहर के दुर्गा चौक में गणेश चतुर्थी पर पिछले तीन पीढ़ियों से भगवान गणेश की जगह मां संतोषी को विराजित करने की अनूठी परंपरा चली आ रही है।

आपको बता दें कि वर्ष 1975 में ‘जय संतोषी मां’ फिल्म रिलीज हुई थी। फिल्म के बाद संतोषी मां के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा और अधिक बढ़ी। इसका प्रभाव राजनांदगांव में भी देखने को मिला। वर्ष 1976 में फिल्म देखने के बाद दुर्गा चौक के चार-पांच बुजुर्गों ने एक समिति का गठन किया और गणेश पर्व के दौरान मां संतोषी को विराजित करने का निर्णय लिया।

इसके बाद शुरू हुई यह परंपरा आज करीब 51 साल बाद भी लगातार जारी है। यानी तीन पीढ़ियों से दुर्गा चौक के लोग मां संतोषी की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।

यहां दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में चना और गुड़ दिया जाता है। समिति के सदस्यों के अनुसार, मां संतोषी के प्रति श्रद्धा के चलते इस परंपरा को हर साल पूरी आस्था और उत्साह के साथ निभाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर मां संतोषी को विराजित करने की यह परंपरा अपने आप में अनोखी है। फिल्म से प्रेरित होकर शुरू हुई यह पहल अब राजनांदगांव की एक खास धार्मिक परंपरा बन चुकी है।

 

Related Articles

Back to top button