गरियाबंद

10 दिन से भूख हड़ताल कर रहे अनिल को मामने पहुंचा प्रशासन, बैरंग लौटा

नियम नहीं फिर भी तीसरी बार अनिल को मोटर ट्राइसाइकिल देने प्रशासन तैयार, फिर भी नहीं माना

AINS NEWS गरियाबंद… जिला मुख्यालय के गांधी मैदान में 10 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग अनिल यादव को मनाने बुधवार शाम प्रशासन की टीम पहुंची। नगर पालिका अध्यक्ष रिखी राम यादव के नेतृत्व में पहुंचे एसडीएम हितेश्वरी बागे, तहसीलदार मयंक अग्रवाल, नगर पालिका सीएमओ संध्या वर्मा, समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक ठाकुर और गरियाबंद रेंजर प्रांजलि मिश्रा ने उनकी मांगो को लेकर करीब दो घंटे तक बातचीत की। अधिकारियों ने एक-एक मांग पर स्थिति स्पष्ट की और उपलब्ध नियमों के तहत समाधान का रास्ता भी बताया, लेकिन अनिल अपनी मांगों पर कायम रहा और लिखित आश्वासन के बिना भूख हड़ताल समाप्त करने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार प्रशासन की टीम बैरंग लौट गई।

अनिल की मांगों में पक्का आवास, वन विभाग में किए गए कार्य की मजदूरी का भुगतान, मोटर ट्राइसाइकिल और आजीविका का स्थायी साधन शामिल है। इनमें मोटर ट्राइसाइकिल की मांग पर विभाग तत्काल पहल करने को तैयार हुआ, लेकिन जमीन और आवास के मामले में प्रशासन के सामने नियमों की बाध्यता है। जिसके चलते कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

आवास की मांग: नगर पालिका सीएमओ संध्या वर्मा के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही के पास स्वयं की भूमि होना जरूरी है। अनिल के पास भूमि नहीं है। नगरीय क्षेत्र में फिलहाल शासकीय जमीन का पट्टा देने अथवा भूमि आवंटित करने की कोई योजना भी नहीं है। ऐसे में प्रशासन न तो तत्काल जमीन देने का लिखित आश्वासन दे सकता है और न ही मौजूदा स्थिति में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर सकता है।

वन विभाग की मजदूरी: रेंजर प्रांजलि मिश्रा के अनुसार अनिल यादव ने वर्ष 2017 तक वन विभाग में काम किया था और विभागीय रिकॉर्ड में उसका पूरा भुगतान हो चुका है। अनिल करीब 10 महीने की मजदूरी बकाया होने की बात कह रहा है, लेकिन इस दावे से संबंधित कोई दस्तावेज उसके पास नहीं है। विभाग के वर्तमान कर्मचारियों के पास भी उसके बताए समय में उसके द्वारा काम किए जाने की पुष्टि करने वाला रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में विभाग तत्काल बकाया भुगतान का लिखित आश्वासन देने की स्थिति में नहीं है।

मोटर ट्राइसाइकिल: समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक ठाकुर ने बताया कि अनिल को 31 अक्टूबर 2020 और 15 मार्च 2024 को ट्राइसाइकिल दी जा चुकी है। नियम के अनुसार 10 वर्ष में एक बार ट्राइसाइकिल देने का प्रावधान है। इसके बावजूद उसकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए विभाग ने फिर ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने सहमत है, एक बार वह इंकार कर दिया।

आजीविका की मांग: अनिल स्थायी आजीविका का साधन भी चाहता है। इस पर मौके पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। पहली तीन मांगों पर ही करीब दो घंटे तक चर्चा चलती रही। धरनास्थल पर मौजूद लोगों ने भी अधिकारियों के सामने अपने-अपने तर्क रखे और अनिल को लिखित आश्वासन देने तथा आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करते रहे।

एसडीएम हितेश्वरी बागे ने बताया कि अनिल को पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया और भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए समझाइश दी गई, लेकिन वह नहीं माना। फिलहाल प्रशासन रहने के लिए रैन बसेरा में रहने की व्यवस्था करने तैयार है, लेकिन वह तैयार नहीं है।

मौके पर पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि जिला मुख्यालय में पूरा प्रशासनिक अमला होने के बावजूद एक व्यक्ति 10 दिन से भूखा बैठा है, यह अच्छी बात नहीं है। प्रशासन को उसकी समस्याओं के जल्द निराकरण की दिशा में पहल करनी चाहिए।

अब देखना लाजमी होगा कि इस पूरे मामले में अब आगे क्या होता है। एक मांग पर विभाग तत्काल पहल करने को तैयार है और बाकी मांगों में जमीन, आवास पात्रता तथा भुगतान से जुड़े नियम अड़चन है। तो लिखित आश्वासन को लेकर गतिरोध कब और कैसे टूटेगा।

 

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