सेजस छुरा में एक ही विषय के दो व्याख्याता : पदस्थापना प्रक्रिया पर सवाल
बताया ये भी जा रहा है कि अन्य व्याख्याता ध्रुव प्रतिनियुक्ति पर आये हैं

AINS NEWS/जीवन एस साहू/गरियाबंद… जिले के छुरा ब्लॉक की सेजेस स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल छुरा में जीव विज्ञान विषय के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। मिली जानकारी के अनुसार यहां जीव विज्ञान विषय पर पहले ही एक शिक्षिका मनीषा भोई नियुक्त है। अब इसी स्कूल में एक अन्य व्याख्याता की पदस्थापना, “डीईओ के विकल्प, के तौर पर कर दी गई है। बताया ये भी जा रहा है कि अन्य व्याख्याता ध्रुव प्रतिनियुक्ति पर आये हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर द्वारा,प्रतिनियुक्ति के पद पर भी शासन के आदेश की अवहेलना करते हुये सेजेश आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल छुरा में एक अन्य व्याख्याता की पदस्थापना कर दी गई।
जानकारों के अनुसार प्रतिनियुक्ति के पद पर शासन के द्वारा पदस्थापना दी जाती है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शासन के आदेश को दर -किनार कर एक अन्य व्याख्यायता को, एक ऐसे स्कूल में पदस्थापना दी गई,जहां पहले से ही विषयवार शिक्षक मौजूद हैं।
बताया जाता है कि प्रतिनियुक्ति के पद पर नियुक्ति देना जिला शिक्षा अधिकारी का अधिकार नहीं है।
अब सवाल ये भी है कि आखिर “डीईओ के विकल्प” का प्रशासनिक अर्थ क्या है ? क्या इसका आशय यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी को शासन द्वारा निर्धारित प्रतिनियुक्ति के पद पर अपनी ओर से किसी व्यक्ति को पदस्थ करने का अधिकार है ? यदि हां, तो यह अधिकार शासन किस आदेश अथवा विभागीय प्रावधान के तहत प्राप्त है ? और यदि ऐसा कोई अधिकार नहीं है,तो प्रतिनियुक्ति के पद पर एक अन्य व्याख्याता की पदस्थापना किस सक्षम अधिकारी के आदेश से हुई ? वो भी ऐसे स्कूल में जहां पहले से ही विषयवार शिक्षिका मौजूद हैं। दूसरी तरफ मैनपुर विकासखंड की लाटापारा स्कूल जीव विज्ञान विषय के शिक्षक ही नहीं है।
ऐसे में शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिये कि “डीईओ के विकल्प” का उल्लेख किस आदेश, अधिकार अथवा प्रक्रिया के संदर्भ में किया गया है। क्या यह शासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को प्रदत्त कोई विशेष अधिकार है, या जिला स्तर पर लिया गया प्रशासनिक निर्णय ?
इस मामले में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सेजेस छुरा में जीव विज्ञान विषय के दो व्याख्याता क्यों पदस्थ किये गये । इससे आगे का सवाल यह है कि जिस पद को प्रतिनियुक्ति का बताया जा रहा है, उस पर पदस्थापना की पूरी प्रक्रिया क्या रही और निर्णय लेने का अधिकार किस स्तर पर था ?
यदि श्री ध्रुव की पदस्थापना वास्तव में “डीईओ के विकल्प” पर हुई है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिये कि इस विकल्प का आधार क्या था और इसके लिये कौन-सा शासन का आदेश लागू किया गया। वहीं यदि यह पद शासन स्तर से भरे जाने वाला प्रतिनियुक्ति पद था, तो जिला स्तर से की गई पदस्थापना की वैधानिक एवं प्रशासनिक स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिये।
लाटापारा के विद्यार्थियों का सवाल भी बरकरार
इस पूरे मामले का दूसरा पहलू मैनपुर विकासखंड के लाटापारा हाईस्कूल से जुड़ा है। वहां शिक्षकों की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि जीव विज्ञान के व्याख्याता की पदस्थापना ऐसे विद्यालय में हुई है जहां इसी विषय का एक व्याख्याता पहले से मौजूद है।
यही वजह है कि ग्रामीण अब यह सवाल उठा रहे हैं कि शिक्षकों की वास्तविक जरूरत वाले विद्यालय में पदस्थापना करने के बजाय एक ही विषय के दो व्याख्याताओं को एक ही स्कूल में रखने का निर्णय क्यों लिया गया ?




