गरियाबंद

गरियाबंद में पटवारियों के आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप, चार सदस्यों के निलंबन से भड़का आक्रोश

निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध, जिला अध्यक्ष गुलशन यदु बोले—प्रशासन ने शांतिपूर्ण आंदोलन में घी डालने का काम किया

AINS NEWS गरियाबंद… पीवी (PV) ऐप की समस्याओं सहित चार सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिला मुख्यालय के गांधी मैदान में जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब उग्र रूप ले लिया है। आंदोलन के बीच एसडीएम गरियाबंद द्वारा जिला पटवारी संघ के चार सदस्यों के निलंबन आदेश जारी किए जाने से पटवारियों में भारी नाराजगी देखने को मिली। विरोधस्वरूप आंदोलनकारियों ने निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों के तेवर और तल्ख हो गए हैं।

*निलंबन की कार्रवाई से भड़का आक्रोश, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप*

पटवारी संघ पीवी ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण, कथित दंडात्मक निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई वापस लेने, वेतन विसंगति दूर करने और राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति सहित चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है। संघ का कहना है कि इन समस्याओं से शासन और विभाग को अवगत कराने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं होने से पटवारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

इसी बीच चार सदस्यों के निलंबन की कार्रवाई ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया। पटवारियों ने इसे अपनी मांगों के बीच की गई कार्रवाई बताते हुए विरोध दर्ज कराया। गांधी मैदान में निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

*जिला अध्यक्ष गुलशन यदु बोले—प्रशासन ने घी डालकर भड़काया आंदोलन*

जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष गुलशन यदु ने निलंबन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पटवारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने निलंबन आदेश जारी कर जलते आक्रोश में घी डालने का काम किया है।

उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान करने और संघ से संवाद स्थापित करने के बजाय इस तरह की कार्रवाई से आंदोलनकारियों में असंतोष बढ़ा है। संघ अपनी मांगों के निराकरण की अपेक्षा कर रहा है, लेकिन निलंबन की कार्रवाई ने विवाद को और गहरा कर दिया है।

*मनोज खरे का दोटूक ऐलान—‘अब आंदोलन नहीं रुकेगा, जेल जाने को भी तैयार’*

वहीं, पटवारी मनोज खरे ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शांतिपूर्ण आंदोलन में पेट्रोल डालने जैसा बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पटवारियों का आंदोलन अब नहीं रुकेगा। प्रशासन चाहे उन्हें जेल भेज दे, वे इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन अपनी मांगों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।

मनोज खरे के इस बयान से आंदोलनकारियों के कड़े रुख का अंदाजा लगाया जा सकता है। निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध और नेताओं के तल्ख बयानों ने जिला मुख्यालय में आंदोलन को लेकर माहौल गरमा दिया है।

*चार सूत्रीय मांगों पर कायम संघ, प्रशासन के सामने चुनौती*

पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पीवी ऐप की तकनीकी समस्याओं का समाधान, निलंबन एवं स्थानांतरण की कथित दंडात्मक कार्रवाई वापस लेना, वेतन विसंगति दूर करना तथा राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति शामिल हैं। संघ का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

इधर, अनिश्चितकालीन हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर किसानों और आम नागरिकों के भूमि संबंधी प्रकरणों, फसल सत्यापन, राजस्व अभिलेखों तथा अन्य जरूरी शासकीय कार्यों पर पड़ सकता है।

*अब सवाल—संवाद से निकलेगा समाधान या बढ़ेगा टकराव?*

गरियाबंद में पटवारियों के आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच टकराव की स्थिति गंभीर होती दिखाई दे रही है। एक ओर पटवारी संघ अपनी चार सूत्रीय मांगों पर अड़ा है, तो दूसरी ओर चार सदस्यों के निलंबन ने विवाद को और हवा दे दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन आंदोलनकारियों से संवाद कर गतिरोध समाप्त करने की पहल करेगा या निलंबन की कार्रवाई के बाद आंदोलन और व्यापक रूप लेगा?

फिलहाल, गांधी मैदान में जारी आंदोलन के बीच सबकी निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम और पटवारी संघ की रणनीति पर टिकी हैं। आम जनता के राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए मांगों और निलंबन विवाद का समाधान निकालना महत्वपूर्ण होगा।

 

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