छत्तीसगढ़

आनन फानन में 5 जनवरी को ही ट्रकों को छोड़ने का आदेश जारी कैसे दे दिया ? पकड़ाये खाद की जांच को लेकर खडा होने लगा है सवाल

खाद विक्रेता अमानक खाद को डी.ए.पी.खाद से अच्छा बताकर बहुत अधिक दर पर बेचकर मालामाल होते जा रहे हैं

AINS NEWS 24X7 केशकाल….  केशकाल तहसील के सिलाटी में कृषि विभाग द्वारा 5 जनवरी को पकड़े गये दो ट्रक अमानक खाद के प्रकरंण की सही ढंग से जांच पूरा हो नहीं पाई, इस बीच अमानक संदिग्ध खाद का परिवहन करते पकड़े गये दोनों ट्रकों को छोड़ दिये जाने से हो रही जांच अटक गई वहीं जांच की दिशा भी भटक गई।
कृषि विभाग के जांच पूर्ण होने के पूर्व ही दोनों ट्रकों को छोड़ देने को लेकर राजस्व विभाग के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी और धनौरा पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाया जाने लगा है ।
प्राप्त जानकारी अनुसार 5 जनवरी की सुबह कृषि विभाग के अधिकारी सिलाटी पंहुचकर दो ट्रक खाद को पकडकर जांच कर आवश्यक औपचारिकता पूर्ण कर रहे थे इसी दरम्यान केशकाल के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शंकरलाल सिन्हा मौके पर पंहुच गये और उन्होंने मामले में हस्तक्षेप करते हुए खाद लदे दोनों ट्रकों को धनौरा पुलिस के सुपुर्द करने मौखिक तौर पर निर्देशित करते थानेदार धनौरा को मोबाईल करके दोनों ट्रकों को थाना में रखने के लिए कहा ।
जांच करने वाले कृषि विभाग के अधिकारी ने पकड़े गये खाद के संबंध में आवश्यक कागजी कार्रवाई करके 5 जनवरी शाम को थाना प्रभारी धनौरा को दोनों ट्रक एवं खाद के सुपुर्दगी का कागजात प्रदान किया।
इसी दरम्यान तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) केशकाल शंकरलाल सिन्हा ने 5 जनवरी को दोनों ट्रकों को छोड़ने हेतु थाना प्रभारी धनौरा को लिखीत ज्ञापन जारी कर दिया।
कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व )के द्वारा जारी आदेश क्र./164/अ.वि.अ./2024 केशकाल दिनांक 05-01-2024 में थाना प्रभारी धनौरा को ट्रक क्रमांक C. G 12S 3546 एवं C. B . 07CBO 654 को सुपुर्दगी से मुक्त किए जाने बाबत विषयांतर्गत लिखा गया कि “दिनांक 05-01-2024को आपके सुपुर्दगी दी गई ट्रक क्र. C. G. 12 S 3546 एवं C. B. 07 CBO 654 के मालिक के द्वारा खाद के संबंध में आवश्यक जी.एस.टी.दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। खाद के असली नकली होने के संबंध में कृषि विभाग के द्वारा परीक्षण उपरांत कार्रवाई किया जायेगा।


उपरोक्त वाहनों में भरे गये खाद को कृषि विभाग के अधिकारी श्री हेमलाल पद्माकर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक के सुपुर्दगी में दिया जाकर दोनों वाहनों को वाहन मालिक अमित शर्मा निवासी धमतरी जिला धमतरी के सुपुर्दगी में दिया जावे । ”
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व ) केशकाल के द्वारा जारी इस ज्ञापन को लेकर अब यह सवाल खड़ा किया जा रहा है कि – अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) असली नकली खाद के मामले की जांच कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक द्वारा किया जा रहा है और जांच पूर्ण नहीं हो पाया है तो उन्होंने जांच करने वाले अधिकारी से बगैर जानकारी प्रतिवेदन लिए ही आनन फानन में 5 जनवरी को ही ट्रकों को छोड़ने का आदेश जारी कैसे दे दिया ? अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)ने दोनों ट्रकों का मालिक धमतरी के अमित शर्मा का होना कैसे मान लिया और किस आधार पर दोनों ट्रकों को अमित शर्मा के सुपुर्दगी में देने किस आधार पर आदेश दे दिया।
इसी तरह से थाना प्रभारी के द्वारा ट्रकों को छोड़ें जाने तथा सुपुर्दगी में सौंपे गये खाद को परिवहन कर केशकाल ले जाने देने और फिर केशकाल लैम्प्स गोदाम से खाद का परिवहन कराकर धनौरा लाने को लेकर भी गंभीर सवाल किया जाने लगा है ‌।
मामले पर पैनी निगाह रखकर जानकारी रखने वालों का कहना है कि जब खाद लदे ट्रकों को कृषि विभाग के अधिकारी द्वारा लिखीत में थाना प्रभारी के सुपुर्द किया गया था तो थाना प्रभारी ने सुपुर्दगी में सौंपने वाले कृषि विभाग के अधिकारी के बगैर लिखीत आदेश प्राप्त किये ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व केशकाल के आदेश पर ट्रकों को कैसे बगैर ट्रक मालिक के तस्दीक किये और ट्रक मालिक के उपस्थित हुए ही अनाधिकृत ब्यक्ति कों ट्रक सुपुर्द कर दिया तथा कृषि विभाग के अधिकारी और किसी सक्षम अधिकारी के बगैर लिखीत आदेश के खाद को केशकाल परिवहन करके ले जाने कैसे दे दिया और किस आदेश के परिपालन में फिर से केशकाल लैम्प्स गोदाम में रखे हुए खाद का परिवहन कराकर फिर धनौरा थाना में लाकर रखवाया गया । धनौरा थाना से केशकाल लैम्प्स गोदाम और फिर केशकाल लैम्प्स गोदाम से धनौरा थाना तक के परिवहन का भांडा तथा हमाली किसने किस मद से दिया और उसके भुगतान का पत्रक रखा गया है की नहीं।


इस मामले में यह उम्मीद की जा रही थी कि कृषि विभाग के द्वारा पकड़े गये खाद के मामले में जांच करते हुए खाद के उत्पादक वितरक से लेकर गांव गांव तक पंहुचा कर अधिक दर पर बेचे जाने वाले अमानक खाद के रैकेट का भंडाफोड़ किया जावेगा परन्तु आधा अधुरा जांच अधर में अटक कर रह गया और जांच पूर्ण होने के पूर्व ही ट्रकों को छोड़ दिये जाने से जांच भी अपने दिशा से भटक कर रह गया।
इस मामले में गौर करने वाली बात यह भी है कि जब खाद लदे ट्रकों को पकड़ा गया तब दोनों ट्रक चालकों ने खाद के संबंध में कोई कागजात जांच अधिकारी को नहीं दिखाकर यह बोला गया था कोई कागज नहीं है ।पर उसी तारीख को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा ट्रक छोड़ें जाने के समय खाद का बिल सुलभ करा दिया गया। इतनी जल्दी खाद का बिल महासमुंद से कैसे आ गया इस पर हैरत जाहिर किया जा रहा है । खाद का बिल नीलेश दीपांकर निवासी सिंगनपुर के नाम पर कटा हुआ पेश किया गया वहीं जब ट्रक छोड़ने का आदेश जारी किया गया तो उसमें नीलेश दीपांकर को मध्यप्रदेश के रीवा जिला के ग्राम डीहवार थाना देवतालाब दर्शाया गया है । दोनों ट्रक के ड्राईव्हरों को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) केशकाल के ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदान किया गया पर ट्रक मालिकों तथा खाद के विक्रेता वितरक या क्रेता को ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदान नहीं किया गया‌ । ज्ञापन की प्रतिलिपि मामले की जांच कर रहे वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक को भी जारी किया जाना जारी ज्ञापन में दर्शा तो दिया गया पर उन्हें जारी ज्ञापन की प्रति बहुत विलम्ब से दिया गया जब पूरे मामले का गुड़ गोबर हो गया ।


जिसके चलते ही अब कृषि विभाग के अधिकारी भी यह कहने लग गये हैं की राजस्व विभाग के अधिकारी बीच में हस्तक्षेप करके पूरे मामले को उलझाकर रख दिये।
वहीं नियम कानून के जानकारों का कहना है कि उर्वरक अधिनियम के तहत पकड़े गये वाहन को छोड़ने का अधिकार अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को है ही नहीं इसलिए केशकाल सिलाटी में पकड़े गये ट्रकों को छोड़ने का आदेश अधिकार सीमा के बाहर जाकर किया गया है जिसे सही नहीं माना जा सकता है ।
उल्लेखनीय है की इस मामले में केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम एवं छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग के सचिव तथा संचालक को पत्र लिखकर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र केशकाल जिला कोंडागांव के ग्राम सिलाटी में अमानक खाद के भंडारण एवं परिवहन का प्रकरंण की सूक्ष्म जांच तथा विस्तृत जांच की मांग किया गया है जिस पर भी अभी तक परिणांम जनक कार्रवाई नहीं किया गया है ‌।
वहीं कोंडागांव जिला कलेक्टर द्वारा भी मामले से जुड़े संबंधितों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है और मामले की सुनवाई किया जा रहा है ।
जांच कब तक पूर्ण होती है और परिणांम क्या आता है यह भविष्य में पता चलेगा पर यह तो जगजाहिर है की जबसे डी.ए.पी.खाद की आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है तबसे अवसर का नाजायज़ लाभ उठाते हुए खाद विक्रेता अमानक खाद को डी.ए.पी.खाद से अच्छा बताकर बहुत अधिक दर पर बेचकर मालामाल होते जा रहे हैं वहीं गांव के किसान ठगी के शिकार होने को लाचार हो रहे हैं।

 

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