साइबर क्राइम का मामला समझ कर मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के नाम का उपयोग कर डाला बड़बोले व्यापारी ने, महिला अधिकारी ने किस उद्देश्य से ऑडियो को वायरल किया
फोन रिकॉर्ड करना और उसे मीडिया में जारी करने का अधिकार जी.एस.टी. महिला अधिकारी को किसने दिया यह भी जांच का विषय है

AINS NEWS… खबर बड़ी है, बड़बोले व्यापारी ने माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी का नाम लिया माननीय वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी जी का नाम लिया। आजकल साइबर क्राइम बढ़ रहा है। ठगी के रोज नए नए पैंतरे अपना रहे हैं ठग। हो सकता है इस व्यापारी ने महिला इंस्पेक्टर को भी साइबर क्रिमनल समझ कर कुछ बड़बोला बखान कर दिया। माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी का नाम लिया जिससे सरकार नाराज़ हो गई। इस व्यापारी की मनोदशा डिप्रेशन की प्रतीत हो रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार व्यापारी मुनीष शाह के बेटे ने गलती स्वीकार करते हुए पत्र लिखकर माफी मांगी है।

लेकिन इस खबर का दूसरा कानूनी पहलू यह है कि क्या महिला इंस्पेक्टर ने व्यापारी का फोन टेप करने की विधिवत रूप से परमिशन ली है । कानूनन यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है जिसमें इस महिला अधिकारी को भी जेल हो सकती है। इस महिला अधिकारी ने दूसरा अपराध और कर दिया है उस फोन रिकॉर्डिंग को मीडिया में जारी कर दिया। इससे उस व्यापारी व सरकार की छवि खराब हुई है।
व्यापारी के अनुसार उसने साइबर क्राइम का मामला समझ कर मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के नाम का उपयोग कर डाला।
क्या मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का नाम लेने भर से शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हो जाती है। क्योंकि व्यापारी तो व्यापार स्थल पर मौजूद ही नहीं था। माननीय मुख्यमंत्री व माननीय वित्त मंत्री जी के यहाँ शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए क्योंकि उनके नाम का उपयोग किया है व्यापारी ने। महिला अधिकारी को यह कहा है कि वह एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज करा देगा इस बात की शिकायत दर्ज कराने का जीएसटी की महिला अधिकारी को भी है लेकिन फोन रिकॉर्ड करना और उसे मीडिया में जारी करने का अधिकार जी.एस.टी. महिला अधिकारी को किसने दिया यह भी जांच का विषय है, पुलिस विभाग को इस विषय की भी जांच करनी चाहिए। व्यापारी का पत्र लिखा पत्र भी साथ में संलग्न है।
महिला अधिकारी ने किस उद्देश्य से इस ऑडियो को वायरल किया था। महिला अधिकारी ने इस आडियो वायरल करने की क्या अपने वरिष्ठ अधिकारियों से परमिशन ली थी? क्या कोई लिखित इज़ाज़त वरिष्ठ अधिकारी ने दी थी। यह विषय भी जांच का है। क्या यह व्यापारी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ है? इसकी भी जांच होनी चाहिए।





