नक्सलियों के कब्जे से 19 वर्षों बाद मुक्त हुआ कोंटा गोलापल्ली मार्ग
पहले गोलापल्ली जाने के लिए तेलंगाना होकर 140 किमी का चक्कर लगाना पड़ता था

AINS NEWS सुकमा… जिले के कोंटा में सुरक्षाबलों द्वारा 8 से 16 सितंबर के बीच तुमालभट्टी -उसकावाया, वीरागंगरेल, मेहता और पालीगुड़ा में चार नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने के बाद, सुकमा जिले के घुर नक्सल प्रभावित दुर्दांत नक्सली रावुलु श्रीनिवास उर्फ रमन्ना के गढ़ गोलापल्ली गांव के लोगों को कोंटा ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने के लिए अब मांत्र 45 किमी की ही यात्रा करनी पड़ रही है, इससे पहले गोलापल्ली जाने के लिए तेलंगाना होकर 140 किमी का चक्कर लगाना पड़ता था। 19 वर्षों के बाद कोंटा-गोलापल्ली मार्ग फिर से शुरू हो गया है। निर्माण के बीच दोपहिया वाहनों का आवागमन शुरू हो चुका है, अब इस सड़क के बनने से दो दर्जन से ज्यादा गांव सीधे ब्लाक मुख्यालय से जुड़ सकेंगे।

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने कहा कि नए कैंपों से न केवल शांति स्थापित होगी, बल्कि कोंटा-गोलापल्ली सड़क का निर्माण भी तेजी से पूरा हगा। जहां कभी खौफ का साया था, अब वहां सड़क और उम्मीद की गूंज सुनाई दे रही है। मार्ग निर्माण से स्थानीय लोगों को समय और दूरी दोनों की बचत होगी। इससे क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीणों के जीवन में सहूलियतें आएंगी। यह परियोजना लंबे समय से प्रतीक्षित थी और अब बस्तर क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगाई है।
सलवा जुडूम आंदोलन के बाद वर्ष 2006 से बंद था रास्ता
वर्ष 2006 में सलवा जुडूम आंदोलन के बाद गोलापल्ली इलाके पर नक्सलियों ने कब्जा कर लिया और मुख्य रास्ते को बंद करवा दिया और पूरे इलाके को विकास से काट दिया था। इसलिए ग्रामीणों को अपने जरूरी काम के लिए मरईगुडा और लक्ष्यपुरम से तेलंगाना होकर 140 किमी की दूरी तय कर कोंटा आना पड़ता था। नए सुरक्षा कैंपों के स्थापित होने के चलते सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। बीते दो सालों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी हद तक सीमित कर दिया है।
बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था रमन्ना
रावुलु श्रीनिवास उर्फ रमन्ना सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था। उस पर छत्तीसगढ़ में 40 लाख रुपये सहित कुल 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी था। वह बस्तर क्षेत्र में कई बड़े नक्सली हमलों का मस्टरमाइंड था। इनमें 2010 का ताड़मेटला हमला भी शामिल है, जिसमें 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इसके साथ ही वह 2013 के झीरम घाटी हमला का भी योजनाकार था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मारे गए थे। दिसंबर, 2019 में बीमारी के चलते बस्तर में ही उसकी मौत हो गई थी। रावुलु श्रीनिवास उर्फ रमन्ना की मौत के बाद उसकी पत्नि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की वरिष्ठ नेता और पार्टी के दक्षिण बस्तर संभाग की संभागीय समिति की सदस्य मदावी हदेमे उर्फ सावित्री ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम महेंद्र रेड्डी के समक्ष 21 सितंबर, 2022 को आत्मसमर्पण कर दिया था।




