बस्तर

असम राइफल्स के शहीद जवान रंजीत की पार्थिव देह तीन दिन बाद पहुंचा गृहग्राम बालेंगा

शहीद के पार्थिव शरीर को गृहमंत्री ने दिया कंधा

AINS NEWS जगदलपुर… बस्तर जिले के बालेंगा निवासी  बलीदानी रंजीत कश्यप
असम राइफल्स के जवान की पार्थिव देह सोमवार की सुबह जगदलपुर एयरपोर्ट पहुंचा। बता दें कि मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर उग्रवादियों के हमले में रंजीत कश्यप शहीद हुए
थे। जगदलपुर एयरपोर्ट में बलीदानी रंजीत कश्यप के परिवार के लोगों के साथ
ही उसके दोस्त जगदलपुर पहुंचकर बाइक रैली के माध्यम से रंजीत के पार्थिव
देह को लेकर गृहग्राम बालेंगा पहुंचे, रास्ते भर तिरंगा लहराने के साथ ही
भारत माता के जयकारों के साथ बलीदानी रंजीत के शव को गृहग्राम ले जाया
गया। जहां सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी ।
बलीदानी रंजीत कश्यप की पत्नी से लेकर मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
मां को तीन दिनों से निरंतर रोता देख व परिवार में रोजाना लोगों की बढ़ती
भीड़ को देखकर मणिपुर के उग्रवादी हमले में बलिदान जवान की दो बेटियां
परिवार से पूछ रही हैं कि, आखिर घर में चल क्या रहा है, वहीं सबसे छोटी
बेटी को तो यह सब पता ही नहीं कि, आखिर घर में क्या हो रहा है।

शहीद के पार्थिव शरीर को गृहमंत्री ने दिया कंधा

शहीद राइफल मैन रंजीत कश्यप का पार्थिव शरीर रायपुर पहुंचा, इस दौरान
एयरपोर्ट पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कंधा दिया। उन्होंने कहा कि  मणिपुर
में असम राइफल्स पर हुए कायरतापूर्ण हमले में हमारे बस्तर के वीर सपूत
राइफलमैन रंजीत कश्यप ने सर्वोच्च बलिदान दिया। आज रायपुर एयरपोर्ट पर
शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा कि ईश्वर शहीद आत्मा को शांति प्रदान करें
और शोकाकुल परिजनों को यह गहन दुख सहन करने की शक्ति दें।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के
काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया, इस हमले में दो जवान बलिदान हो गए,
जबकि तीन अन्य जवान घायल हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला शाम
करीब छह बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में हुआ। असम
राइफल्स के जवानों का वाहन इंफाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहा था, तभी घात
लगाकर बैठे उग्रवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में बलिदान
होने वाले जवान रंजीत कुमार कश्यप कुछ दिन पहले ही अपने बीमार पिता को
देखने के लिए एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए हुए थे, रविवार को जाने के
बाद ही शुक्रवार की शाम हुए हमले में रंजीत बलिदान हो गए।

बलीदानी रंजीत कश्यप बस्तर जिले के बालेंगा गांव के रहने वाले थे। रंजीत
2016 में असम राइफल्स में भर्ती हुए। ग्रामीणों और दोस्तों के मुताबिक रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आए थे। करीब एक महीने तक अपने
परिजनों के साथ रहे। इसके बाद 14 सितंबर को वह ड्यूटी पर लौटे थे। गांव के दोस्तों ने बताया कि रंजीत ने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं। इसके बाद रिटायर होकर गांव लौट जाऊंगा और बुजुर्ग माता पिता का सहारा बनूंगा, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। वहीं परिजन
बताते हैं कि रंजीत का सपना देश की रक्षा करने का था। वह अपने परिवार का
इकलौता बेटा था। अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन बेटियों को छोड़ गए
हैं। रंजीत की तीन बेटियां हैं। एक बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई
है।

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