बस्तर

‘महाघोटाले’ का पर्दाफाश किया अमित जोगी ने, सीबीआई निदेशक को लिखा पत्र

अमित जोगी के अनुसार ये छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा कथित घोटाला है

AINS NEWS… जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने एक कथित ‘महाघोटाले’ का पर्दाफाश करने का दावा करते हुए सीबीआई निदेशक को पत्र लिखा है. उनकी मांग है कि 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े इन कथित अनियमित मामलों की तुरंत सीबीआई जांच कराई जाए.

अमित जोगी के आरोपों के मुताबिक, इस कथित घोटाले के तीन मुख्य हिस्से हैं.

पहला, नागरनार स्टील प्लांट.

अमित जोगी का आरोप है कि नागरनार स्टील प्लांट की 26,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं. 26,000 करोड़… ये वो संपत्ति है जो प्रदेश की जनता की है.

दूसरा, बैलाडिला लौह अयस्क खदानें.

आरोप है कि इन खदानों की करीब 85,000 करोड़ रुपये की खनिज संपत्ति को भी निजी हाथों में देने की तैयारी है. 26,000 करोड़ का प्लांट और 85,000 करोड़ की खदानें… ये दोनों मिलकर ही एक लाख करोड़ से ऊपर का आंकड़ा पार कर जाते हैं.

 तीसरा, भविष्य का राजस्व.

अमित जोगी का कहना है कि इन फैसलों से राज्य को भविष्य में होने वाले राजस्व में 40,000 करोड़ रुपये की संभावित हानि होगी.

मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू है एक गंभीर विसंगति, एक विरोधाभास. अमित जोगी ने प्रधानमंत्री के 3 अक्टूबर 2023 के उस सार्वजनिक बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “नागरनार स्टील प्लांट का निजीकरण नहीं होगा.” ये एक सार्वजनिक आश्वासन था.

लेकिन, जोगी का आरोप है कि इस आश्वासन के ठीक विपरीत, एनएमडीसी की 29 अक्टूबर 2025 की एक रिपोर्ट कुछ और ही कहती है. इस रिपोर्ट में ‘विनिवेश जारी’ होने की पुष्टि की गई है. सवाल ये है कि अगर प्रधानमंत्री ने ‘निजीकरण नहीं होगा’ कहा, तो फिर ये ‘विनिवेश जारी’ कैसे है? ये वो यक्ष प्रश्न है जिसने इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है.

अमित जोगी ने इस कथित घोटाले को लेकर एक पूरी समयरेखा, एक टाइमलाइन भी जारी की है. उनके मुताबिक, ये सब कुछ बेहद तेज़ी से हुआ.

29 अक्टूबर 2025: एनएमडीसी ने नागरनार स्टील प्लांट के 90% शेयर एक निजी कंपनी को बेचने की मंजूरी दी.
1 नवंबर 2025: पर्यावरण मंत्रालय ने किरंदुल से अनकापल्ली तक जाने वाली स्लरी पाइपलाइन को हरी झंडी दे दी.
7 नवंबर 2025: इस्पात मंत्रालय ने इस सौदे पर अपनी अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी.
और 9 नवंबर 2025: कई जिलों में भूमि अधिग्रहण को स्वीकृति देते हुए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया.

इस 1.5 लाख करोड़ के घोटाले के आरोपों के साथ-साथ, कोयला आयात में 120 करोड़ रुपये की एक और कथित गड़बड़ी का आरोप भी लगाया गया है. इस आरोप के मुताबिक, कोयला आयात के लिए एक ऐसी अमेरिकी कंपनी से अनुबंध किया गया, जो कथित तौर पर अस्तित्व में ही नहीं है.

अमित जोगी ने इसे सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि एक कानूनी उल्लंघन भी बताया है. उनका कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, धन शोधन निवारण अधिनियम 2014 (PMLA) और विशेष रूप से पेसा कानून 1996 का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है. पेसा कानून, जो आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिकार देता है, उसे भी ताक पर रख दिया गया.

अमित जोगी ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

1. निजीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों को तुरंत वापस लिया जाए.
2. एनएमडीसी स्टील के सीएमडी सार्वजनिक रूप से माफी जारी करें.
3. नागरनार प्लांट को एक स्थायी सार्वजनिक इकाई घोषित करने की कानूनी गारंटी दी जाए.

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इन मांगों को पूरा करने के लिए अमित जोगी ने 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) पूरे राज्य में एक बड़ा ‘जन आंदोलन’ शुरू करेगी.

अमित जोगी के अनुसार ये छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा कथित घोटाला है. 1.5 लाख करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति दांव पर है. एक तरफ प्रधानमंत्री का आश्वासन है, दूसरी तरफ विनिवेश की रिपोर्ट. अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले की सीबीआई जांच होती है? क्या सरकार इन मांगों पर कोई कदम उठाती है?

 

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