छत्तीसगढ़

पुलिस विभाग में बाल जीरो कट व दाढ़ी क्लीन शेव रखने का नियम नही : उज्जवल दीवान

1861 से अब तक अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों की वजह से पुलिस कर्मचारियों का लगातार शोषण होता आया

AINS NEWS… उज्जवल दीवान, अध्यक्ष सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवँ परिवार कल्याण संघ के द्वारा लगाए गए सूचना के अधिकार में पुलिस मुख्यालय अटल नगर, नवा रायपुर से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि पुलिस विभाग में कार्यरत जवानों को बाल जीरो कट और दाढ़ी क्लीन शेव रखने का कोई नियम नही है। उज्जवल दीवान ने बताया कि सन 1861 से अब तक अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों की वजह से पुलिस कर्मचारियों का लगातार शोषण होता आया है, अंग्रेज तो भारत देश छोड़ कर चले गए परन्तु अंग्रेजों के फर्जी नियमों को थोपने वाले आज भी भारत देश में रह रहे हैं।

पुलिस विभाग में कार्यरत बहुत से कर्मचारियों को बाल जीरो कट नही करने और दाढ़ी नही बनाने की वजह से अनुशासनहीनता बता कर उनके सेवा पुस्तिका में सजा दे दी गई है और जवानों को सजा देने वाले अधिकारियों को खुद ही नियमों का ज्ञान नही है, सिर्फ पुरानी प्रचलित बातों के आधार पर आज तक चले आ रहे हैं जो कि जवानों के प्रति अधिकारियों के द्वारा किये जाने वाले अन्याय का साक्षात उदाहरण है,

अंग्रेज ठंडे क्षेत्र में रखने वाले थे जहां उनकी दाढ़ी नही उगती थी और बाल भी लंबे नही होते थे जब अंग्रेज भारत मे आए तो उन्हें भारतीय पुरूषों की घनी दाढ़ी व बाल देख कर जलन होने लगी तब उन्होंने अपना वर्चश्व बनाए रखने के लिए अपने अधीन काम करने वाले जवानों को डरा-धमका कर दाढ़ी क्लीन शेव करने व बाल छोटे करवाने बोले, अंग्रेजों के गुलाम जवान उस दिन तो क्लीन शेव कर के बाल छोटे करवा लिए उसके बाद यह खबर पूरे देश में फैल गई लेकिन पूरे भारत देश के जवानों में इतनी हिम्मत नही थी कि अंग्रेज अधिकारी से पूछ लें कि मैं अपने बाल और दाढ़ी क्यों कटवाऊं

तब से लेकर आज तक पुलिस विभाग के जवान पूरे वर्ष भर सुबह 4-5 बजे उठ कर क्लीन शेव करते हैं फिर हर मंगलवार और शुक्रवार को बाल जीरो कट करवाते हैं, लेकिन इन सब के लिए जवान भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वे अपने विभाग के मूल नियमों व कानून की किताब का पूर्णतः ज्ञान नही रखते हैं इसलिए जवानों को कई जगहों पर अपमानित भी होना पड़ता है, अब अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए गुलामी की प्रथा बदलने का समय आ चुका है जवान अपने हक के प्रति लगातार जागरूक हो रहे हैं अब वह दिन दूर नही है जब पुलिस विभाग में भी सभी को बराबर का अधिकार मिलेगा और सभी को समान नजर से देखा जाएगा।

 

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