IAS अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
नीतीश सरकार ने उन्हें दिसंबर 2025 में बिहार राजस्व बोर्ड का अतिरिक्त सदस्य नियुक्त किया

AINS NEWS… बिहार कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच के अनुसार, ये मामला उस समय का है जब संजीव हंस भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में निजी सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन (NCDRC) से मुंबई स्थित ‘ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स’ के पक्ष में आदेश दिलाने और कंपनी की निदेशक की गिरफ्तारी रुकवाने के लिए 1 करोड़ की रिश्वत ली थी।

सीबीआई ने जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसके अनुसार संजीव हंस ने अपने करीबी विपुल बंसल के माध्यम से आरएनए ग्रुप के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल से संपर्क साधा था। सीक्रेट मीटिंग के दौरान ये तय हुआ कि 1 करोड़ की रिश्वत के बदले बिल्डर को आयोग से अनुकूल आदेश दिलाए जाएंगे। समझौते के बाद, संजीव हंस ने कथित तौर पर अपने ओहदे का इस्तेमाल कर न केवल बिल्डर के पक्ष में तारीखें तय कराईं, बल्कि निदेशक सारंगा अग्रवाल की संभावित गिरफ्तारी पर भी रोक लगवा दी।
सीबीआई ने खुलासा किया है कि 1 करोड़ की ये भारी-भरकम रकम एक बार में नहीं, बल्कि कई किस्तों में और अलग-अलग माध्यमों से संजीव हंस तक पहुंचाई गई। इसमें बैंक ट्रांसफर के साथ-साथ हवाला नेटवर्क का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। 9 अगस्त 2019 को 15 लाख की रकम बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते में भेजी गई, जिसे संजीव हंस के करीबी देवेंद्र सिंह आनंद का बताया जा रहा है।
आईएएस संजीव हंस पर बिहार स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में करोड़ों के घोटाले का आरोप है। संजीव हंस 10 महीने बाद जेल से बाहर निकले तो नई पोस्टिंग के लिए 6 महीने का इंतजार करना पड़ा। फिर नीतीश सरकार ने उन्हें दिसंबर 2025 में बिहार राजस्व बोर्ड का अतिरिक्त सदस्य नियुक्त किया। तब से उसी पोस्ट पर हैं।




