सामाजिक समरसता सम्मेलन, समस्या का समाधान कानून से नहीं संगठित समाज के निर्णय से होता है – सुधीर गौतम
सामाजिक कार्यों में फिजूलखर्च बंद करने पर किया विचार

AINS NEWS गरियाबंद… आरएसएस के सामाजिक समरसता सम्मेलन में सामाजिक सद्भावना बनाए रख सशक्त हिंदू राष्ट्र बनाए रखने का संकल्प लिया गया। बौद्धिक में प्रभारी सुधीर गौतम बोले समस्या का समाधान कानून से नहीं संगठित समाज के निर्णय से होता है। आज देवभोग के स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने खंड स्तरीय समरता सम्मेलन का आयोजन किया।जिसमें देवभोग खंड क्षेत्र से विभिन्न हिंदू समाज के पदाधिकारी और प्रमुख ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

प्रमुख वक्ता के तौर पर सामाजिक समरसता के प्रदेश सह प्रभारी सुधीर गौतम पहुंचे हुए थे। खंड संघचालक आचार्य मनोज रघुवंशी के मौजूदगी में सुधीर गौतम ने समाज प्रमुखों को संबोधित कर सनातनी हिंदू समाज को संगठित रखने सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ ही हिंदुत्व के भाव जागृत करने की अपील किया।वक्ता ने कहा कि ऐसे बैठके विशेष अवसर पर ही नहीं बल्कि प्रत्येक 3 माह में स्थानीय स्तर पर किए जाने चाहिए।वक्ता ने अन्य समाज की तुलना में हिंदू समाज के कमजोर संगठन पर चिंता जाहिर किया।हिंदू भाव जागृत कर देश में संगठित रहने के विकल्प को चुनने की अपील किया।

उन्होंने हिंदुस्तान के दो महापुरुष स्वामी विवेकानंद एवं केशव बली राम हेडगेवाकर के जीवनी के कई प्रसंगों का उदाहरण देकर कहा कि सार्वजनिक मंच पर इन दोनों ने पहली बार मैं हिंदू हु का ऐलान कर समाज को नया परिभाषा दिया था।सुधीर गौतम ने कहा कि कई छोटी बड़ी समस्या का समाधान कानून से नहीं बल्कि एक जुट समाज कर देता है।अयोध्या में भगवान राम का विशालकाय मंदिर निर्माण हो या फिर कन्वर्टेड लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित करने के लिए बस्तर से निकली आवाज,इसका जीता जागता उदाहरण है । वक्त ने पंच परिवर्तन के जरिए समाज को संगठित कर संगठित राष्ट्र निर्माण के लिए सहभागी बनने की अपील किया।।कार्यक्रम का संचालन अनिल सिन्हा ने किया।

सामाजिक कार्यों में फिजूलखर्च बंद करने पर किया विचार_
आर एस एस के इस मंच को विभिन्न समाज के पदाधिकारियों ने भी सम्बंधित कर अपने विचार रखे।सुधीर भाई पटेल,केनूराम यादव,बृंदावन ठाकुर,माखन कश्यप,परमानंद मरकाम,सुशील निधि,गुरुनारायण तिवारी ,तस्मित पात्र समेत अन्य समाज प्रमुखों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए शादी विवाह ,बालिका व्रत विवाह जैसे आयोजन में मांस मदिरा और अन्य भद्दे नाच और बारात में विलंब पर रोक लगाने की बात पर विचार किया। कई समाज प्रमुखों ने अपने समाज में इस नेक नियम को पूर्व से लागू करने और उसके सकारात्मक परिणाम को अन्य समाज के समक्ष बतौर उदाहरण प्रस्तुत किया।सोशल मीडिया में विवादास्पद टिप्पणी और भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने की बात भी कह कर सनातनी हिंदू समाज को संगठित रखने पर जोर दिया।




