पैरी उद्गम के पुनर्जागरण का शंखनाद: विन्द्रानवागढ़ के भाजपा कार्यकर्ता डॉ. मनीष सिन्हा की पहल रंग लाई
पर्यटन बोर्ड ने विकास प्रस्ताव को दी सकारात्मक सहमति

AINS NEWS गरियाबंद… विन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के हितों के लिए निरंतर सक्रिय और जनभावनाओं के प्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. मनीष सिन्हा की सार्थक पहल ने आखिरकार असर दिखाया है। मैनपुर क्षेत्र की भाटीगढ़ (भाठीगढ़) पहाड़ी पर स्थित पवित्र पैरी नदी के उद्गम स्थल के सौंदर्यीकरण और समग्र पर्यटन विकास की मांग पर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने सकारात्मक संकेत देते हुए सहमति जताई है।
यह पहल केवल एक पत्राचार भर नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल की आस्था, प्रकृति और संभावनाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है।

*”मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र से खुला विकास का द्वार”*
ज्ञात हो कि पिछले माह गरियाबंद भाजपा जिला-मंत्री डॉ. मनीष सिन्हा ने भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. देवेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष पैरी नदी उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल में शामिल करने की मांग रखी थी।
डॉ. सिन्हा द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेजे गए विस्तृत मांग-पत्र में पैरी नदी उद्गम स्थल के प्राकृतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए इसे राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का आग्रह किया गया था।
पर्यटन बोर्ड द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह स्थल पहले से ही जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है तथा भविष्य में यदि पर्यटन विकास की कोई व्यापक योजना बनाई जाती है, तो डॉ. सिन्हा के सुझावों को प्राथमिकता के साथ शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

*”विकास का समग्र खाका: आस्था से रोजगार तक”*
डॉ. मनीष सिन्हा ने अपने प्रस्ताव में जिन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया, वे इस प्रकार हैं—
उद्गम स्थल तक सुदृढ़ एवं सुरक्षित सड़क निर्माण
पहाड़ी तक सुगम सीढ़ी व्यवस्था
आकर्षक व्यू-प्वाइंट का निर्माण
प्रकाश एवं सौंदर्यीकरण की आधुनिक व्यवस्था
पेयजल, शौचालय एवं सुरक्षा सुविधाएं
पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र एवं विश्राम स्थल
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुविधाओं के विकसित होने से यह क्षेत्र प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और इको-टूरिज्म का संगम बन सकता है।
*”स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए आयाम”*
इस प्रस्तावित विकास से न केवल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य स्टॉल, होम-स्टे एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच मिल सकेगा।
विन्द्रानवागढ़ अंचल के जानकारों का कहना है कि यदि यह परियोजना मूर्त रूप लेती है तो यह क्षेत्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगा।
*”जननायक की पहचान और बढ़ा जनविश्वास“*
डॉ. मनीष सिन्हा की इस पहल को क्षेत्रवासियों ने सर्वगुण सराहनीय बताया है। लोगों का कहना है कि वे केवल राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि विन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के विकास पुरुष और जनआकांक्षाओं के सच्चे वाहक बनकर उभरे हैं।
ग्रामीणों में इस निर्णय को लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी इसे क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल करार दिया है।
*”पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान की ओर”*
पैरी नदी का उद्गम स्थल प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है। यदि प्रस्तावित विकास योजनाएं क्रियान्वित होती हैं, तो यह स्थल न केवल गरियाबंद जिले बल्कि पूरे प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक नई और विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है।
विन्द्रानवागढ़ की धरती पर विकास की यह दस्तक अब उम्मीदों को नई उड़ान दे रही है — और इस परिवर्तनकारी पहल के केंद्र में हैं डॉ. मनीष सिन्हा, जिनकी दूरदर्शिता ने क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दी है।




