RAIPUR

E20 पेट्रोल पर देश का पहला बड़ा फैसला: कार खराब होने पर उपभोक्ता को नई कार या मुआवजा देने का आदेश

उपभोक्ता फोरम तक पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती

AINS NEWS रायपुर… छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर देश का पहला महत्वपूर्ण उपभोक्ता मामला सामने आया है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक ऐतिहासिक आदेश में कार निर्माता मारुति सुजुकी को ग्राहक की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार बदलकर उसी मॉडल की नई E20-अनुकूल कार देने अथवा वाहन की कीमत के साथ क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है।

आयोग ने यह आदेश 14 जुलाई 2026 को रायपुर निवासी किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देवता की शिकायत पर सुनाया। शिकायत में कहा गया था कि वाहन खरीदते समय कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी कार E20 पेट्रोल के साथ पूरी तरह अनुकूल (कम्पेटिबल) नहीं है। बाद में E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहन में तकनीकी खराबी आने लगी। आयोग ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

यह निर्णय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि देशभर में चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो गया है कि जिन वाहनों को E20 के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है, उन पर इस ईंधन का अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव क्या हो सकता है।

उपभोक्ता फोरम तक पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती
हालांकि इस फैसले ने उपभोक्ताओं में उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन उपभोक्ता आयोग तक न्याय पाने की राह अब भी आसान नहीं मानी जाती। सामान्य धारणा है कि उपभोक्ता मामलों का निपटारा 90 दिनों के भीतर होना चाहिए और कई मामलों में 3 से 5 महीने में फैसला भी हो जाता है। लेकिन व्यवहारिक स्थिति यह है कि अनेक मामलों में सुनवाई 2 से 5 वर्ष या उससे अधिक समय तक चलती रहती है।

राजधानी रायपुर का उपभोक्ता आयोग रायपुर के साथ-साथ गरियाबंद जिले के मामलों की भी सुनवाई करता है। मामलों की अधिक संख्या के कारण सुनवाई में विलंब होना आम बात है। लगातार तारीखें पड़ने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के चलते कई सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ता न्याय की लड़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी कंपनियां भी इस स्थिति का लाभ उठाती हैं। उन्हें पता होता है कि अधिकांश उपभोक्ता समय और खर्च के कारण उपभोक्ता आयोग तक नहीं पहुंच पाएंगे। यदि कोई मामला दर्ज भी हो जाता है तो कंपनियां अपनी कानूनी टीम के माध्यम से लंबे समय तक मुकदमा लड़ती रहती हैं।

फैसले का महत्व
रायपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला न केवल E20 पेट्रोल और वाहन अनुकूलता के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि यदि किसी उत्पाद की महत्वपूर्ण जानकारी उपभोक्ता से छिपाई जाती है और उससे नुकसान होता है, तो उपभोक्ता को न्याय मिल सकता है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के अधिकारों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

 

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