‘जंगल की निःशब्द रानी’ का विमोचन, एक बाघिन के संघर्ष से प्रकृति संरक्षण का संदेश
यह पुस्तक किसी कल्पना की कहानी नहीं, बल्कि एक घायल बाघिन के जीवन संघर्ष, उसके उपचार, संरक्षण और पुनर्जीवन की सच्ची गाथा है

AINS NEWS रायपुर… विश्व बाघ दिवस के अवसर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए रायपुर प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष एवं स्वदेश के पत्रकार दिनेश यदु द्वारा लिखित पुस्तक ‘जंगल की निःशब्द रानी’ का विमोचन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के करकमलों से किया गया। समारोह में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, वरिष्ठ वीडियो पत्रकार इकराम कुरैशी सहित अनेक पत्रकार, साहित्यकार एवं वन्यजीव प्रेमी उपस्थित रहे।

यह पुस्तक किसी कल्पना की कहानी नहीं, बल्कि एक घायल बाघिन के जीवन संघर्ष, उसके उपचार, संरक्षण और पुनर्जीवन की सच्ची गाथा है। कभी गंभीर रूप से घायल होकर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही यह बाघिन आज अचानकमार टाइगर रिजर्व की पहचान बन चुकी है। लेखक ने उसके संघर्ष को केवल एक वन्यजीव की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संवेदनशील रिश्ते के रूप में प्रस्तुत किया है।
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन और वन्यजीव हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘जंगल की निःशब्द रानी’ जैसी पुस्तकें लोगों को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं तथा विशेष रूप से युवाओं में संरक्षण की भावना विकसित करने का कार्य करती हैं।
लेखक दिनेश यदु ने बताया कि पुस्तक लिखने का उद्देश्य केवल एक बाघिन की कहानी कहना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि यदि समय पर संरक्षण और उपचार मिले तो वन्यजीवों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल जंगलों की शान नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के आधार हैं। इनके संरक्षण से ही वन और जैव विविधता सुरक्षित रह सकती है।
विश्व बाघ दिवस पर पुस्तक का यह विमोचन साहित्य, पत्रकारिता और वन्यजीव संरक्षण के संगम का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। उपस्थित लोगों ने इसे प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने वाली एक सार्थक पहल बताया।




