प्रशासन की नाक के नीचे बगैर अनुमति श्रद्धालुओं से ₹50 की वसूली, हजारों वाहनों की पार्किंग से उठे बड़े सवाल
अवैध वसूली को लेकर सरपंच से लेकर समिति और जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे हुए हैं

AINS NEWS/जीवन एस साहू/गरियाबंद… जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ धाम में सावन के दौरान देश-प्रदेश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के अलौकिक शिवलिंग के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। लेकिन श्रद्धा और आस्था के इस केंद्र तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले ही पार्किंग के नाम पर कथित तौर पर ₹50 का शुल्क देना पड़ रहा है।

खास बात यह है कि मौके पर न तो पार्किंग शुल्क की स्पष्ट दर संबंधी सूचना दिखाई देती है अवैध वसूली को लेकर सरपंच से लेकर समिति और जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे हुए हैं , जो बात कर रहे हैं वह गोल-गोल जवाब दे रहे हैं। नगद संग्रह का हिसाब कौन देख रहा है मंदिर समिति या ग्राम पंचायत के किस खाते में राशि जा रही है इसकी किसी के पास कोई जानकारी नहीं है

पार्किंग के नाम पर हो रही वसूली की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं
मौके पर सामने आई व्यवस्था के अनुसार पारागांव मे वाहन पार्क करने के बाद तत्काल कोई टिकट नहीं दिया जाता,बल्कि वाहन निकालते समय पार्किंग शुल्क जरूर लिया जा रहा है। श्रद्धालुओं द्वारा शुल्क और उसकी अनुमति को लेकर सवाल किए जाने पर अलग-अलग जवाब सामने आए। कुछ लोगों ने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने की बात कही, तो किसी ने पारागांव समिति द्वारा निर्णय लेने और किसी ने पार्किंग ठेके पर दिए जाने की बात कही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो उस प्रस्ताव की प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? श्रद्धालुओं को शुल्क की जानकारी देने वाला स्पष्ट बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
मामले की पड़ताल के दौरान पार्किंग व्यवस्था से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति ने बताया कि करीब एक हजार पर्चियां छपवाई गई हैं और पिछले दो सप्ताह में कई हजार वाहन पार्क हो चुके हैं। वहीं मौके पर मिली रसीदों में करीब 4800 तक की क्रम संख्या दिखाई दी। ऐसे में पार्किंग से होने वाली कुल वसूली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अपनी डफली अपना राग,सभी का अपना अपना अलग बयान
मौके पर बातचीत में ग्रामीणों के भी अलग-अलग बयान सामने आए। किसी ने कहा कि ग्राम समिति ने पार्किंग का निर्णय लिया है, किसी ने इसे ठेके पर दिए जाने की बात कही, जबकि कई ग्रामीणों ने साफ कहा कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है और कुछ लोग मिलकर पार्किंग की राशि वसूल रहे हैं। ग्रामीणों के बीच वसूली की राशि के हिसाब-किताब को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। क्या ग्रामीणो द्वारा संगठित गिरोह बना कर की जा रही वसूली ?

हिसाब किताब और टैक्स चोरी का मामला
इससे सवाल उठता है कि आखिर पार्किंग की जिम्मेदारी किसकी है? वसूली किसके आदेश से हो रही है? राशि किस खाते में जमा हो रही है? और प्रतिदिन होने वाली वसूली का हिसाब कौन रख रहा है? क्या जी एस टी, सेवा शुल्क पटाया जा रहा हैं?
यदि प्रत्येक वाहन से ₹50 लिया जाता है और हजारों वाहन प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं, तो यह मामूली राशि नहीं रह जाती। ऐसे में पूरी वसूली का हिसाब-किताब, राशि जमा करने की प्रक्रिया और उससे होने वाले खर्च का सार्वजनिक होना बेहद जरूरी है।
सावन में यहां भीड़ उमड़ती है और हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ होती हैं जिसमे भूतेश्वरनाथ धाम में खास कर शनिवार,रविवार और सोमवार को विशेष रूप से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और छोटे बड़े वाहन यहां पहुंचते हैं। सावन के महीने में यहां वाहनों का दबाव और भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में पार्किंग व्यवस्था करना जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर श्रद्धालुओं से शुल्क लिया जा रहा है तो उसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में दर्शन के लिए आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो कम से कम शुल्क की दर,जिम्मेदार संस्था अनुमति और वसूली की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।मामले में सबसे गंभीर बात ग्राम सभा के प्रस्ताव का हवाला देकर वसूली को जायज ठहराने की है। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की अपनी निर्धारित शक्तियां और सीमाएं हैं। ऐसे में केवल ग्राम सभा का प्रस्ताव होने की बात कहकर किसी भी प्रकार की शुल्क वसूली को स्वतः वैध नहीं माना जा सकता। यदि पार्किंग शुल्क वसूलने का अधिकार या अनुमति किसी सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक है,तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
शासन प्रशासन की हो रही बदनामी
पूरे छत्तीसगढ़ से श्रद्धांलु यंहा पहुँचे हैं ऐसे मे इस वसूली से जिला प्रशासन ही नहीं प्रदेश सरकार की छबि भी घूमिल हो रही हैं। लोग सरकार के निगरानी व प्रशासनिक दक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। प्रशासन की नजर अब तक इस व्यवस्था पर क्यों नहीं पड़ी? यदि प्रशासन को इसकी जानकारी है तो शुल्क वसूली की अनुमति किस आधार पर दी गई? और यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?.यह मामला केवल ₹50 की वसूली का नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं से होने वाली वसूली की पारदर्शिता और जवाबदेही का है।

प्रशासन को पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए भूतेश्वरनाथ धाम में जिला प्रशासन और मंदिर समिति को मिलकर ऐसी व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिसमें श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यदि पार्किंग शुल्क लेना जरूरी है तो उसका स्पष्ट निर्धारण, अधिकृत रसीद, सूचना बोर्ड, जिम्मेदार संस्था सुविधाए, कैमेरा और वसूली की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
आस्था के केंद्र पर आने वाले श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन कर संतोष और खुशी लेकर जाएं, न कि पार्किंग के नाम पर कथित मनमानी वसूली का अनुभव लेकर लौटें। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर पार्किंग शुल्क की अनुमति, ग्राम सभा के कथित प्रस्ताव, वसूली की राशि और पिछले वर्षों के हिसाब-किताब की जांच करता है या फिर यह व्यवस्था इसी तरह चलती रहती है।
जिला अधिकारी जवाबदेही से बचते रहे
इस संबध मे 15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस मर दिन भर जिले के कलेक्टर से जानकारी के लिए फोन लगाते रहे लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और न ही अनुविभागीय अधिकारी ने। एस पी महोदय का साफ कहना हैं की यह कलेक्टर के कार्यक्षेत्र का मामला हैं वही बता पाएंगे।




