निरई माता में 22 मार्च को जात्रा, 5 घंटे के लिए भक्तो को होते है निरई माता के दर्शन
मां निरई देवी का ही चमत्कार है कि बिना तेल के ज्योति नौ दिनों तक जलती रहती है

AINS NEWS गरियाबंद… चैत्र नवरात्र में मुहेरा के निरई माता पर लोगो की मान्यता और आस्था का खुमार देखते ही बनता है । गरियाबंद से 12 किलोमीटर दूर स्थित निरई माता धाम जहां हजारों श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी करने के लिए मुराद मांगते है । चैत्र नवरात्र के समय पड़ने वाले पहले रविवार को ही यहां केवल पांच घंटे के लिए भक्त दर्शन कर पाते है 200 साल पुराने भक्ति के आस्था केंद्र निरई माता धाम जहां न मूर्ति है और न ही कोई मंदिर फिर भी हजारों श्रद्धालुगण यहां अपनी मन्नत लेकर आते है । और उसके पूरा होने पर बकरे की बलि देकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते है ।

इस देव स्थल की खास बात ये है कि यह मंदिर साल में सिर्फ पांच घंटे के लिए ही खुलता है। आमतौर पर मंदिरों में जहां दिन भर देवी-देवताओं की पूजा होती है, तो वहीं निरई माता के मंदिर में चैत्र नवरात्रि में केवल एक विशेष दिन ही 5 घंटे यानी सुबह 4 बजे से 9 बजे तक माता के दर्शन किए जा सकते हैं। बाकी दिनों में यहां आना प्रतिबंधित होता है। जब भी यह मंदिर खुलता है, यहां माता के दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं। निरई माता की उंची पहाड़ी में नवरात्र के एक सप्ताह पूर्व प्रकाश पुंज ज्योति के समान चमकता हैं। और चैत्र नवरात्रि के प्रथम सप्ताह रविवार को जात्रा मनाया जाता हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मां निरई देवी का ही चमत्कार है कि बिना तेल के ज्योति नौ दिनों तक जलती रहती है।

महिलाओं का जाना है वर्जित
निरई माता मंदिर में महिलाओं को प्रवेश और पूजा-पाठ की इजाजत नहीं है। यहां सिर्फ पुरुष ही पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं। आपको बता दें कि महिलाओं के लिए इस मंदिर का प्रसाद खाना भी वर्जित है। कहते हैं कि महिलाएं अगर मंदिर का प्रसाद खा लें, तो उनके साथ कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है। ग्रामीण बताते है कि इसके पीछे 200 साल पुरानी मान्यता है। आज से दो सौ वर्ष पूर्व मोहेरा ग्राम के मालगुजार जयराम गिरी गोस्वामी ने निरई माता की पूजा करने बहुरसिंग ध्रुव के पूर्वजों को छ: एकड़ जमीन दान में दिए थे। जमीन में कृषि कर आमदनी से माता की पूजा पाठ और जात्रा संपन्न हो रहा है।




