छत्तीसगढ़

अनारक्षित पद किसी जाति के लिए आरक्षित नहीं, हाईकोर्ट के आदेश से GEWA के अभियान को मिला महत्वपूर्ण आधार

भर्ती एवं पदोन्नति में वरिष्ठता, योग्यता और मेरिट के आधार पर सभी पात्रों को मिले समान अवसर — 2006 से 2017 तक की पदोन्नतियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग

AINS NEWS मुंगेली/बिलासपुर/रायपुर… गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के हालिया 9 सितंबर 26 के महत्वपूर्ण आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि अनारक्षित पद का अर्थ किसी एक जाति अथवा वर्ग के लिए आरक्षित पद नहीं है। भर्ती और पदोन्नति में नियमों के अनुसार पात्रता रखने वाले सभी वर्गों के अभ्यर्थियों/कर्मचारियों को वरिष्ठता, योग्यता एवं मेरिट के आधार पर विचार का समान अवसर मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट के समक्ष आए पदोन्नति संबंधी प्रकरण में न्यायालय ने विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करते हुए Review DPC के माध्यम से मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। GEWA प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि यह आदेश भर्ती एवं पदोन्नति में अनारक्षित पदों की वास्तविक प्रकृति को समझने तथा नियमों के पारदर्शी पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

अनारक्षित को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित मानना नियमों की भावना के विपरीत

कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि संगठन लंबे समय से इस विषय को उठाता रहा है कि कई स्थानों पर अनारक्षित पदों को व्यवहार में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित मान लेने से अन्य वर्गों के ऐसे पात्र अभ्यर्थी और कर्मचारी, जो अपनी योग्यता, वरिष्ठता अथवा मेरिट के आधार पर अनारक्षित पद पर चयन अथवा पदोन्नति प्राप्त कर सकते हैं, अवसर से वंचित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी यदि अपनी योग्यता एवं वरिष्ठता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्र है, तो केवल उसकी जातिगत श्रेणी के आधार पर उसे अनारक्षित पद की प्रतिस्पर्धा से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

बेमेतरा से बस्तर और सरगुजा तक नियमों की विभागवार समीक्षा हो

गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छ ग ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा, जांजगीर, बस्तर, सरगुजा सहित विभिन्न जिलों, संभागों एवं विभागों में भर्ती एवं पदोन्नति के दौरान अनारक्षित पदों के आवंटन और चयन/पदोन्नति प्रक्रिया में नियमों के अनुपालन की व्यापक समीक्षा आवश्यक है।

संगठन की मांग है कि शासन सभी विभागों में

– पदोन्नति के समय लागू रोस्टर एवं आरक्षण नियमों की जांच करे।
– संबंधित वरिष्ठता सूची का परीक्षण करे।
– विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की कार्यवाही की समीक्षा करे।
– अनारक्षित पदों पर सभी पात्र कर्मचारियों के नामों पर विचार हुआ या नहीं, इसकी जांच करे।
– जहां नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

2006 से 2017 तक की पदोन्नतियों की SIT से जांच की मांग

प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि GEWA की मांग केवल किसी एक विभाग या एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि वर्ष 2006 से 2017 तक विभिन्न विभागों में हुई पदोन्नतियों की व्यापक एवं निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए।

उन्होंने शासन से मांग की कि इस अवधि में हुई पदोन्नतियों में रोस्टर, वरिष्ठता, पात्रता, DPC कार्यवाही तथा अनारक्षित पदों के उपयोग की उच्चस्तरीय SIT अथवा स्वतंत्र जांच समिति से जांच कराई जाए।

यदि जांच में किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा नियमों की अनदेखी कर पात्र कर्मचारियों को उनके वैधानिक अवसर से वंचित करने की बात प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार राहत प्रदान की जाए।

“अनारक्षित का मतलब अवसर सबके लिए” — GEWA

कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि संगठन का स्पष्ट मत है कि अनारक्षित पद किसी जाति का पद नहीं है, बल्कि वह ऐसा पद है जिस पर नियमों के अनुसार सभी पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और नियमों का पालन ही प्रशासनिक व्यवस्था में कर्मचारियों का विश्वास मजबूत कर सकता है। हाईकोर्ट के हालिया आदेश की भावना को ध्यान में रखते हुए शासन को सभी विभागों की पुरानी एवं वर्तमान पदोन्नति प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए।

प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ कर्मचारियों के समान अवसर, न्यायसंगत पदोन्नति और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के लिए अपना अभियान निरंतर जारी रखेगा।

 

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