गरियाबंद

पीवी ऐप की अव्यवस्थाओं के खिलाफ पटवारियों का शंखनाद, गरियाबंद में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

गांधी मैदान में जुटे राजस्व पटवारी, चार प्रमुख मांगों को लेकर खोला मोर्चा; हड़ताल से किसानों और आम जनता की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

AINS NEWS गरियाबंद… पीवी (PV) ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं, कथित दमनात्मक निलंबन और स्थानांतरण की कार्रवाई, वेतन विसंगति तथा पदोन्नति की मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। संघ के प्रांतीय आह्वान पर मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जिला मुख्यालय गरियाबंद के गांधी मैदान में पटवारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। पटवारियों के इस आंदोलन से जिले की राजस्व व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। वहीं, किसानों और आम नागरिकों को भी अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

*चार प्रमुख मांगों को लेकर पटवारियों ने खोला मोर्चा*

राजस्व पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए चार प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। इनमें पीवी ऐप में कार्य करने का बहिष्कार, दमनात्मक निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई वापस लेना, वेतन विसंगति दूर करना और राजस्व निरीक्षक के पद पर विभागीय पदोन्नति सुनिश्चित करना शामिल है।

संघ का कहना है कि पीवी ऐप के माध्यम से फसलों के भौतिक सत्यापन के दौरान विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं। इन कठिनाइयों से विभाग और शासन को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं होने से पटवारियों में असंतोष बढ़ा है। संघ ने लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेने और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है।

*हड़ताल से किसानों के राजस्व कार्यों पर पड़ सकता है असर*

पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का सबसे अधिक असर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका है। भूमि संबंधी अभिलेख, फसल सत्यापन, किसान पंजीयन, सीमांकन, नामांतरण से जुड़े प्रक्रियागत कार्यों तथा आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक राजस्व प्रतिवेदनों के निराकरण में देरी हो सकती है।

विशेषकर उन किसानों की परेशानी बढ़ सकती है, जिन्हें कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ लेने, भूमि अभिलेखों में सुधार कराने अथवा अन्य शासकीय प्रक्रियाओं के लिए पटवारी स्तर पर दस्तावेजों और सत्यापन की आवश्यकता होती है।

हालांकि, इन सेवाओं पर वास्तविक प्रभाव संबंधित कार्य की प्रकृति और विभागीय वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिर भी, हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में आम जनता को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं और कई जरूरी प्रकरण लंबित होने की आशंका है।

*वेतन विसंगति और पदोन्नति का मुद्दा भी आंदोलन में शामिल*

पटवारी संघ ने पीवी ऐप की समस्याओं के साथ वेतन विसंगति और राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। संघ की मांग है कि वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने के साथ पदोन्नति के लंबित मामलों पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

इसके अतिरिक्त, पटवारियों के विरुद्ध की गई कथित दंडात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख आधार है। संघ का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं और तकनीकी कठिनाइयों का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि विभागीय कामकाज और जनसेवाएं प्रभावित न हों।

*शासन के रुख पर टिकी निगाहें*

गरियाबंद के गांधी मैदान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब शासन और राजस्व विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। एक ओर पटवारी अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों और आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं में संभावित व्यवधान की चिंता सता रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासन पटवारियों की मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल करेगा या अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते राजस्व संबंधी कार्यों का दबाव और बढ़ेगा?

जनहित में आवश्यक है कि शासन और पटवारी संघ के बीच सार्थक संवाद स्थापित हो, तकनीकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए और लंबित मांगों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ किसानों एवं आम नागरिकों के जरूरी राजस्व कार्य भी बाधित न हों।

 

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