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वरिष्ठ अभिनेत्री उपासना वैष्णव जाएंगी क्रांति सेना की शरण में, फिल्म से निकाले जाने को लेकर है खफा, करेंगी निर्देशक की शिकायत

मेरे पास b.a. फाइनल ईयर को लेकर डेट की कमी नहीं थी मैं तो आज भी उस फिल्म के कारण घर में खाली बैठी हूं

AINS NEWS…पिछले 2 दिनों से छत्तीसगढ़ी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री उपासना वैष्णव और छत्तीसगढ़ी फिल्म b.a. फाइनल ईयर के निर्देशक के बीच तीखी बहस पढ़ने को मिल रही है। पूरा वाक्या कुछ यूं है की फिल्म b.a. फाइनल ईयर में उपासना वैष्णव को कास्ट किया गया था, उनसे 2 दिन शूटिंग भी करवाई गई जिसका मेहनताना एक महीने बाद ₹10,000 दे दिया गया। उसके बाद ब्रेक किया गया, बाद में उपासना वैष्णव को b.a. फाइनल ईयर के असिस्टेंट डायरेक्टर ने फोन करके सूचित किया कि आपको प्रतिदिन ₹5,000 नहीं दिया जा सकेगा क्योंकि फिल्म के निर्माता बदल गए हैं, आपको डेढ़ हजार रुपए प्रतिदिन में काम करना होगा और महीने भर शूटिंग लोकेशन में ही रहना होगा लेकिन जिस दिन काम होगा उसी दिन का पैसा डेढ़ हजार रुपए के हिसाब से दिया जाएगा। जिस पर उपासना वैष्णव ने आपत्ति की और कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है, जब हमारी बात ₹5,000 प्रतिदिन में तय हुई थी, लेकिन असिस्टेंट डायरेक्टर ने कोई भी सकारात्मक जवाब ना देते हुए उपासना वैष्णव को ही फिल्म से बदल दिया और उनकी जगह किसी और चरित्र अभिनेत्री को कास्ट कर लिया गया,

इस पूरे मामले को लेकर जब हमने b.a. फाइनल ईयर के निर्देशक से बात की तो उन्होंने बताया की ब्रेक के बाद जब हमने शूटिंग शुरू की तब उपासना जी के पास डेट ही नहीं थी, ऐसे में हम क्या करते हमें रोज का डेढ़ लाख रुपया खर्च आ रहा था, हमने उपासना वैष्णव की जगह किसी और अभिनेत्री को कास्ट करना उचित समझा। इधर उपासना वैष्णव का कहना है कि मेरे पास b.a. फाइनल ईयर को लेकर डेट की कमी नहीं थी, मैं तो आज भी उस फिल्म के कारण घर में खाली बैठी हूं। लेकिन इन लोगों ने मुझे फिल्म से निकाल कर अच्छा नहीं किया, रही बात पेमेंट की तो बैठकर बातचीत करते तो कोई ना कोई रास्ता निकल ही आता।
उपासना ने कहा कि अब वे इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना की शरण में जाएंगी और निर्देशक की शिकायत करेंगी। बहरहाल छत्तीसगढ़ी सिनेमा में ऐसी स्थिति का निर्मित होना कोई नई बात नहीं, पहले भी कलाकारों और निर्देशकों के बीच में पेमेंट को लेकर ऐसी बातें हुई हैं, लेकिन छोटी सी इंडस्ट्री में इस तरह का वाक्या होना उचित नहीं। सभी एक दूसरे को समझते हुए मिलजुल कर काम करें तो छत्तीसगढ़ी सिनेमा का सफर काफी लंबा चल सकता है और इसका भविष्य उज्जवल हो सकता है।

 

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