छत्तीसगढ़

आदिवासी कलाकारों ने अपनी पहचान, कला, सभ्यता संस्कृति की आकर्षक झलकियां पेश की

बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों और गानों के माध्यम से अपनी संस्कृति और अधिकारों की आवाज उठाई

AINS NEWS… झारखंड टाटानगर जमशेदपुर में 15 से 19 नवंबर तक बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा जमशेदपुर के गोपाल मैदान में आयोजित जनजातीय संवाद के तीसरे दिन, कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों और गानों के माध्यम से अपनी संस्कृति और अधिकारों की आवाज उठाई।

विभिन्न राज्यों से छत्तीसगढ़ बस्तर कोण्डागांव भोंगापाल से बुद्धदेव क्लब नर्तक दल की टीम, मुरिया आदिवासी कलाकारों ने अपनी पहचान, कला, सभ्यता संस्कृति की आकर्षक गुट्टा मांदरी नृत्य से झलकियां पेश की

टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से बिष्टूपुर के गोपाल मैदान में आयोजित पांच दिवसीय जनजातीय संवाद के तीसरे दिन रविवार को कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों की झड़ी लगा दी। जनजातीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक नृत्य पेश कर अपनी कहानी से पूरी दुनिया को अवगत कराया। कलाकारों की प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर शाम तक डटे रहे।

अलग-अलग 22 राज्यों से आए आदिवासी समुदाय के कलाकारों ने जहां नृत्य से संस्कृति का प्रदर्शन किया, वहीं गीतों के जरिए हक और अधिकार की आवाज भी बुलंद की।
संथाल जनजाति के कलाकारों ने फागुन बोंगा गाने की प्रस्तुति दी, जो बाहा त्योहार से संबंधित है। मुंडा जाति के कलाकारों ने सोना लेकर दिशुम गाने की प्रस्तुति दी। उन्होंने इसके माध्यम से सवाल पूछा कि कि इस सोने जैसी सृष्टि की रचना किसने की।

लेपचा जनजाति के कलाकारों ने नॉन डेट मो गाने की प्रस्तुति दी। पश्चिम बंगाल की टोटो जनजाति की संख्या पूरे विश्व में मात्र 1700 है। उन्होंने जंगल की खूबसूरती को अपने गाने चुंग चांग चा के जरिए प्रस्तुत किया।

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