बहुचर्चित पत्रकार हत्याकांड में विशेष सीबीआई न्यायालय रायपुर में हुई सुनवाई, पुलिस अधिकारियों का बयान भी दर्ज
23 जनवरी 2011 को पत्रकार उमेश राजपूत की उनके निवास पर दिन दहाड़े घर पर पांच लोगों की उपस्थिति के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पत्रकार हत्याकांड में कल 12 अगस्त को विशेष सीबीआई न्यायालय रायपुर में सुनवाई हुई। जिसमें कुछ लोगों के साथ पुलिस अधिकारियों का बयान भी दर्ज किया गया। वहीं अब इस केस की सुनवाई सितंबर माह में होगी। इस हत्याकांड में अब तक सबसे बड़ा पेंच स्थानीय पुलिस थाने के मालखाने से हत्याकांड से साक्ष्य गायब होना में फंसा हुआ है। जहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसे पुलिस ने गायब किया? या किसी प्रभावशाली लोगों के द्वारा गायब कराया गया? क्योंकि इस साक्ष्य के आधार पर जांच पुरी होगी और सीबीआई अपराधियों तक पहुंच पाएगी।

परिजनों की मानें तो घटना स्थल पर मिला धमकी भरा पत्र वहां उपस्थित लोगों के द्वारा ही डाला जा सकता है और उन लोगों का अक्षर एक्सपर्ट मिलान से इस हत्याकांड का खुलासा हो जाता लेकिन ये पत्र भी मालखाने से सीबीआई जांच के दौरान गायब मिला वहीं पुलिस के केस डायरी में ऐसे ही डुप्लीकेट धमकी भरा पत्र लगाया गया था। साथ ही मोबाइल कम्प्यूटर, फायरिंग हुए पर्दे के कपड़े,गन के छर्रे, जैसे कई महत्वपूर्ण साक्ष्य थाने से गायब मिले हैं। अब आने वाले दिनों में जांच एजेंसी सीबीआई के द्वारा क्या साक्ष्य गायब करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी या इनके माध्यम से अपराधियों तक सीबीआई पहुंच पाएगी ये तो आने वाले दिनों में ही पता चल जाएगा।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि 23 जनवरी 2011 को पत्रकार उमेश राजपूत की उनके निवास पर दिन दहाड़े घर पर पांच लोगों की उपस्थिति के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और आज 2025 चल रहा है। आज पंद्रह साल इस घटना को बीत चुके हैं लेकिन अपराधी अभी भी खुली हवा में घुम रहे हैं और परिजन आज भी न्याय की आस लगाए इंतजार कर रहे हैं आखिर न्याय कब तक मिल पाएगा?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन सीबीआई डी एस पी नमो प्रकाश मिश्रा के अनुसार पत्रकार उमेश राजपूत हत्या कांड के साक्ष्य मिटाने और छुपाने के काम मे षड़यंत्र करने वाले तत्कालीन गरियाबंद जिले के पुलिस अधिकारियों और बिलासपुर के अग्रवाल नेता के करीबी की मिली भगत थी। पत्रकार उमेश राजपूत अग्रवाल नेता के काले कारनामों का भंडाफोड़ करने वाला था।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उमेश राजपूत हत्या कांड का मुख्य आरोपी मनोज अग्रवाल नामक व्यक्ति था जो मर्डर केस में बिलासपुर जेल में बन्द था। मनोज अग्रवाल जेल से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाकर कानपुर जांच और इलाज के लिए जाता था। इस मनोज अग्रवाल नामक व्यक्ति की ससुराल कानपुर में है। कानपुर जाने से पहले रायपुर के एक बड़े होटल में शराब पार्टी किया करते थे। मनोज अग्रवाल को हत्याकांड में बचाने के लिए बिलासपुर के बड़े अग्रवाल नेता और तत्कालीन गरियाबंद के पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। इसलिए पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड के आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं और उमेश राजपूत के परिजन न्याय की आस में पेशी दर पेशी न्यायालय के चक्कर लगा रहे हैं।




