रायगढ़

रायगढ़ के चक्रधर समारोह में गायक नितिन दुबे के साथ बजट की कमी का हवाला देते हुए बार्गेनिंग

बाहर से बुलाए गए कलाकारों को उनकी मुंह मांगी रकम दी जाती है। उसमें कोई कटौती नहीं होती

AINS NEWS… रायगढ़ के चक्रधर समारोह में प्रसिद्ध गायक नितिन दुबे के साथ हुई घटना ने छत्तीसगढ़ के कला जगत में एक गहरी बहस छेड़ दी है। इस घटना से यह सवाल उठ रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ के कलाकारों को वास्तव में वह सम्मान और आर्थिक सहायता मिल रही है जिसके वे हकदार हैं।

यह मामला सिर्फ एक गायक का नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के उन सभी कलाकारों की पीड़ा को दर्शाता है जिन्हें अपने ही राज्य में उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि नितिन दुबे को पहले कार्यक्रम के लिए एक निश्चित राशि का वादा किया गया, लेकिन बाद में “बजट की कमी” का हवाला देते हुए उनकी फीस में कभी 40% की कमी फिर 80% फिर 50% कमी इस तरह बार्गेनिंग करते रहे अधिकारी।

इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ के कई कलाकार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब स्थानीय कलाकारों की बात आती है, तो आयोजकों के पास “बजट की कमी” हो जाती है, जबकि बाहर से बुलाए गए कलाकारों को उनकी मुंह मांगी रकम दी जाती है। उसमें कोई कटौती नहीं होती।

इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए सालों से भुगतान नहीं मिला है। 3 से 4 साल तक अपनी मेहनत का पैसा न मिलना कलाकारों के लिए एक बड़ा आर्थिक और मानसिक बोझ है। यह स्थिति कलाकारों को हतोत्साहित करती है और उन्हें अपनी कला जारी रखने से रोकती है।

यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ के कलाकारों के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आई है। मंच पर उन्हें पर्याप्त सम्मान न देना, उनके साथ बदसलूकी करना और उन्हें नजरअंदाज करना आम बात हो गई है। यह सब इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय कला और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।
यह जरूरी है कि सरकार और आयोजक इस मामले को गंभीरता से लें। कलाकारों का सम्मान करना और उन्हें समय पर भुगतान देना न सिर्फ उनका अधिकार है, बल्कि यह राज्य की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक है।

 

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