तेजी से घट रहा बस्तर में तीखुर का रकबा, परंपरागत खेती करना छोड़ रहे बस्तर के किसान
आसमान छू रही तीखुर की कीमत, आमजन से हो रहा दूर

AINS NEWS जगदलपुर… औषधि तीखुर की कीमत 700 रुपए के ऊपर चली गई है। बस्तर में तीखुर का रकबा तेजी से घटा है। यहां के लोग अब दूसरे क्षेत्र की तरफ धान और मक्का की फसल ज्यादा लेने हैं इसलिए परंपरागत तीखुर की खेती सिमट कर रह गई है। इस दिशा में वन और उद्यानिकी विभाग ध्यान दे रहा है और न ही कृषि विभाग। गौरतलब है कि बस्तर के तीखुर को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। औषधि गुणों से परिपूर्ण तीखुर का उपयोग आमतौर पर लोग तीज त्योहारों और व्रतों में ज्यादा करते हैं।

बेच रहे पर बढ़ा नहीं रहे
छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ बाकायदा की तीखुर की पैकेजिंग कर मार्केटिंग करता है, लेकिन वन विभाग स्वयं तीखुर संवर्धित की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहा है। कुछ वर्षों से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत शहीद गुंडाधुर कृषि एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर तीखुर की विभिन्न प्रजातियों को बढ़ाने का कार्य कर रहा है। यह प्रशंसनीय है, किंतु कृषि और उद्यानिकी विभाग इस दिशा में पूरी तरह उदासीन है।




