आरोप, आरक्षक भर्ती की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताएं
प्रदेश भर के अभ्यर्थी अब बिलासपुर हाईकोर्ट की शरण में

AINS ENWS… छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में आरक्षक भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 दिसंबर को जैसे ही जिला स्तर पर चयन सूची जारी हुई, वैसे ही पूरे प्रदेश में बवाल मच गया। आरोप है कि इस भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताएं हुई हैं। हालात यह हैं कि न्याय की गुहार लगाने के लिए प्रदेश भर के अभ्यर्थी अब बिलासपुर हाईकोर्ट की शरण में पहुँच चुके हैं।

गड़बड़ी के आरोप कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि लिखित परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि मेरिट लिस्ट में भारी विसंगतियां हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, कम अंक पाने वालों का चयन कर लिया गया है, जबकि ज्यादा अंक लाने वाले योग्य उम्मीदवारों के नाम लिस्ट से गायब हैं। उदाहरण के तौर पर, एक ओबीसी अभ्यर्थी को शारीरिक परीक्षा में 76 और लिखित में 60, यानी कुल 136 अंक मिले, फिर भी उसका चयन नहीं हुआ। वहीं, आरोप है कि मुंगेली जिले में ही उससे कम नंबर लाने वाले कई उम्मीदवारों का चयन सामान्य वर्ग से कर लिया गया है।
गुरुवार, 11 दिसंबर को बिलासपुर हाईकोर्ट के बाहर एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। भारी संख्या में कैंडिडेट वहां जमा हुए, हालांकि पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसके बाद ये सभी पुलिस ग्राउंड में इकट्ठा हुए। यहाँ एक दिलचस्प वाकया हुआ…जब पुलिस के जवानों ने उन्हें वहां से भी हटने की चेतावनी दी, तो अभ्यर्थी सीधे एसएसपी ऑफिस पहुंच गए। एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के बाद, जब उन्होंने गड़बड़ी के सबूत देने और चर्चा करने की बात कही, तब जाकर उन्हें पुलिस ग्राउंड में रुकने की अनुमति मिली।
अभ्यर्थियों का दावा है कि एक ही एप्लीकेशन नंबर पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं। कहीं रजिस्ट्रेशन नंबर गायब है, तो कहीं पिता का नाम छिपाया गया है। बिलासपुर जिले की लिस्ट में तो सिर्फ नाम और आवेदन नंबर दिया गया है, जिससे यह शक गहराता है कि क्या जानबूझकर पहचान छिपाने की कोशिश की जा रही है?
सबसे बड़ी समस्या ‘डुप्लीकेट चयन’ की है। 2007 के राजपत्र के अनुसार एक कैंडिडेट कई जिलों से फॉर्म भर सकता है, लेकिन इसका नतीजा यह हुआ है कि एक ही उम्मीदवार का नाम 5 से 6 जिलों की चयन सूची में है। अब सोचने वाली बात यह है कि एक व्यक्ति तो एक ही जगह नौकरी ज्वाइन करेगा। ऐसे में बाकी 4-5 सीटें खाली रह जाएंगी और वेटिंग लिस्ट का पेंच ऐसा फंसा है कि योग्य उम्मीदवार बाहर ही रह जाएंगे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वेटिंग लिस्ट में भी खेल हुआ है…अनारक्षित वर्ग की वेटिंग लिस्ट में जिसका नाम है, उसी का नाम रिजर्व कैटेगरी में भी डाल दिया गया है।
इन्हीं तमाम सबूतों और जिलेवार जानकारी को इकट्ठा करके, हजारों युवाओं ने 10 दिसंबर को रणनीति बनाई और अब वे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।




