पूर्व डिप्टी कलेक्टर धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार, हिंदू धर्म के प्रति आपत्तिजनक टीका-टिप्पणी, जिससे धार्मिक भावनाओं को पहुंची ठेस
आरोप है कि वे अपने घर में 'चंगाई सभा' का आयोजन कर लोगों का धर्म परिवर्तन करा रही थीं

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस ने एक पूर्व डिप्टी कलेक्टर को धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. रिटायर्ड अधिकारी ओमेगा टोप्पो पर आरोप है कि वे अपने घर में ‘चंगाई सभा’ का आयोजन कर लोगों का धर्म परिवर्तन करा रही थीं.

पूरी घटना 25 जनवरी की है. जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र के नमनाकला इलाके में रहने वाली 65 वर्षीय सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो के निवास पर रविवार को भारी भीड़ जमा हुई थी. पुलिस के अनुसार, इस सभा में लगभग 60 लोग मौजूद थे. आरोप है कि यहाँ प्रार्थना की आड़ में हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं और लोगों को दूसरे धर्म की ओर प्रेरित किया जा रहा था.
जैसे ही इस सभा की सूचना स्थानीय हिंदूवादी संगठनों को मिली, वे बड़ी संख्या में ओमेगा टोप्पो के घर के बाहर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों का दावा था कि यहाँ लंबे समय से हर रविवार को चंगाई सभा के नाम पर धर्मांतरण का खेल चल रहा है. हंगामे की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची.
विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब पूर्व डिप्टी कलेक्टर ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अपने घर के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया. उन्होंने अधिकारियों से घर के भीतर जाने के लिए जरूरी कानूनी अनुमति के कागजात मांगे और तर्क दिया कि घर के अंदर निजी आराधना चल रही है. आरोप है कि इसी गहमागहमी के बीच घर के अंदर मौजूद ज्यादातर लोगों को पिछले दरवाजे से बाहर निकाल दिया गया.
हिंदूवादी संगठनों ने इस मामले में हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि किसी भी निजी आवास में बिना अनुमति के इस तरह के बड़े धार्मिक अनुष्ठान आयोजित नहीं किए जा सकते. संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की नाक के नीचे धर्मांतरण की कोशिशें की जा रही हैं.
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ओमेगा टोप्पो और उनके साथ मौजूद चार पास्टरों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. कई दिनों की गहन जांच और साक्ष्यों के संकलन के बाद, गांधीनगर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने ओमेगा टोप्पो के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270, 299 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 5 (क) के तहत मामला दर्ज किया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की जांच में यह पाया गया कि सभा के दौरान हिंदू धर्म के प्रति आपत्तिजनक टीका-टिप्पणी की गई थी, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची. जांच पूरी होने के बाद ओमेगा टोप्पो को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है. एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी की गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है.




