छत्तीसगढ़

गणेश उत्सव की एक बेहद अनोखी तस्वीर, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति का संदेश भी

इस गणेश उत्सव की एक और खासियत है यहां का महाप्रसाद

AINS NEWS दीपक यादव… जांजगीर-चांपा के कोसमंदा गांव से गणेश उत्सव की एक बेहद अनोखी तस्वीर सामने आई है। ठाकुरदिया चौक में इस बार ऐसा गणेश पंडाल तैयार किया गया है, जहां गणपति भगवान शंख में विराजमान हैं और उनकी प्रतिमा पूरी तरह गोबर से बनाई गई है।

मिट्टी की दीवारें, पुराने खपरैल की छत और छत्तीसगढ़ी लोककला से सजे इस पंडाल में भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति का संदेश भी देखने को मिल रहा है। इतना ही नहीं, समिति की ओर से दस दिनों तक छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के प्रसिद्ध व्यंजन महाप्रसाद के रूप में बांटे जा रहे हैं।

गणेश प्रतिमा, पंडाल का बाहरी दृश्य, श्रद्धालुओं की भीड़ गणेश चतुर्थी के मौके पर जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव का ठाकुरदिया चौक इन दिनों श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां ठाकुर देव गणेश उत्सव समिति ने इस बार कुछ ऐसा अनोखा किया है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।

शंख में विराजमान गणेश जी, श्रद्धालु दर्शन करते हुए, सेल्फी लेते हुए पंडाल में भगवान गणेश किसी राजसी सिंहासन पर नहीं, बल्कि विशाल शंख में विराजमान हैं।
सबसे खास बात यह है कि गणेश जी की प्रतिमा पूरी तरह गोबर से तैयार की गई है। समिति के मुताबिक, इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश की गई है।

मिट्टी की दीवारें, लीपना, किसान की चित्रकारी, खपरैल की छत शहरों में बनने वाले आधुनिक और चकाचौंध वाले पंडालों से अलग यहां गांव की पारंपरिक पहचान को सामने रखा गया है। पंडाल की दीवारों पर मिट्टी की लिपाई के साथ छत्तीसगढ़ी चौक-लीपना और हल चलाते किसान समेत लोकजीवन से जुड़े चित्र उकेरे गए हैं। वहीं छत पर टीन या प्लास्टिक की जगह पुराने पारंपरिक खपरैल का इस्तेमाल किया गया है।

अलग-अलग व्यंजन, श्रद्धालु प्रसाद लेते हुए इस गणेश उत्सव की एक और खासियत है यहां का महाप्रसाद। समिति ने दस दिनों के लिए छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को शामिल किया है। यानी गणपति के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के पारंपरिक खान-पान से भी रूबरू कराया जा रहा है।

पारंपरिक खेल, कथा आयोजन, परिवारों की भीड़
समिति की ओर से यहां पारंपरिक खेल और धार्मिक कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि गणेश उत्सव को केवल पूजा तक सीमित न रखकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

बच्चों और युवाओं की सेल्फी, गणेश प्रतिमा के क्लोज शॉट, शाम की लाइटिंग यही वजह है कि हर शाम यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
बच्चे हों या युवा, हर कोई इस अनोखे गणेश पंडाल को देखने के साथ गणेश जी के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहा है।

पंडाल के सामने, पीछे गणेश प्रतिमा छत्तीसगढ़ की माटी, गांव की परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश…कोसमंदा के ठाकुरदिया चौक में गणेश उत्सव का ये अंदाज लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।गोबर से बनी गणेश प्रतिमा से लेकर मिट्टी की दीवार और खपरैल की छत तक, पूरा पंडाल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति की झलक दिखा रहा है।और यही वजह है कि यह पंडाल अब श्रद्धालुओं के साथ-साथ लोगों के लिए आकर्षण का खास केंद्र बन गया है।कोसमंदा के इस अनोखे गणेश पंडाल में भक्ति के साथ पर्यावरण और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संदेश भी देखने को मिल रहा है। समिति के मुताबिक, पिछले साल की छत्तीसगढ़ी थीम को आगे बढ़ाते हुए इस बार पंडाल को पूरी तरह प्राकृतिक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।

 

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