डीईओ ने की थी कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा : शासन ने बना दिया प्रभारी बीईओ!
रिश्वत मांगने की गंभीर शिकायत के बीच इन्हें मिली फिंगेश्वर बीईओ की जिम्मेदारी, महज नौ दिन के भीतर हुये प्रशासनिक फैसले ने खड़े किये सवाल

AINS NEWS/जीवन एस साहू/गरियाबंद /फिंगेश्वर… शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फैसलों और जवाबदेही की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है। जिस अधिकारी के विरुद्ध रिश्वत मांगने की गंभीर शिकायत के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी, उसी अधिकारी को शासन ने कुछ ही दिनों बाद महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंप दी। मामला विकासखंड फिंगेश्वर में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे हेमंत कुमार साहू को प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाये जाने से जुड़ा है। इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिये हैं।

पेंशन भुगतान के एवज में 50 हजार रुपये मांगने का आरोप
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरा मामला स्वर्गीय परमानंद ध्रुव की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी संतोषी ध्रुव को मिलने वाले पेंशन एवं अन्य स्वत्वों के भुगतान से जुड़ा है। बताया गया है कि पति की मृत्यु के बाद लंबित पेंशन एवं अन्य देयकों के भुगतान के लिए संतोषी ध्रुव ने विकासखंड शिक्षा कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था।
आरोप है कि भुगतान की प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी हेमंत कुमार साहू एवं कार्यालयीन लिपिक मोहेश्वर मार्कण्डेय द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। इस कथित मांग को लेकर शिकायत सामने आने के बाद मामला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचा।
डीईओ ने माना गंभीर मामला, कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा
इस प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद द्वारा 1 जून 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर को पत्र भेजा गया था। पत्र में शिकायत से संबंधित तथ्यों का उल्लेख करते हुये कहा गया कि शिकायतकर्ता को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा इस घटनाक्रम से विभाग की छवि भी धूमिल हुई है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुये संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई किये जाने की अनुशंसा की थी। विभागीय स्तर पर भेजे गयर इस पत्र से स्पष्ट होता है कि शिकायत को सामान्य प्रशासनिक मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया गया था, बल्कि उच्च कार्यालय को कार्रवाई के लिये लिखा गया था।
नौ दिन बाद ही बदल गई तस्वीर, मिल गई बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प और सवाल खड़ा करने वाला पहलू इसके ठीक नौ दिन बाद सामने आया। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा 10 जून 2026 को आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/440/2026/20-3 जारी किया गया।
इस आदेश के तहत हेमंत कुमार साहू, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, फिंगेश्वर को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, फिंगेश्वर के पद पर पदस्थ कर दिया गया।
यानी एक ओर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा उच्च कार्यालय को भेजी गई थी, तो दूसरी ओर महज नौ दिन बाद मंत्रालय से जारी आदेश में उन्हें उसी विकासखंड में पहले से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंप दी गई।
शिकायत पर क्या हुआ ? शासन के फैसले पर उठ रहे सवाल
अब इस पूरे मामले में कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं। क्या मंत्रालय स्तर पर पदस्थापना का आदेश जारी करने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा और शिकायत से जुड़े दस्तावेजों पर विचार किया गया था ? प्रकरण में विभागीय जांच पूरी हुई या नही इस पर क्या संबंधित अधिकारी को क्लीनचिट दे दी गई थी या फिर शिकायत पर कार्रवाई की प्रक्रिया लंबित थी ?
यदि शिकायत और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था, तो संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने के पीछे क्या आधार रहा ? वहीं, यदि शासन स्तर पर प्रकरण की समीक्षा की गई थी, तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिये।
जवाबदेही होगी तय या फाइलों में चढ़ेगी धूल ?
शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे में अधिकारियों की प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल पदस्थापना तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके निर्णयों और कार्यप्रणाली से विभाग की विश्वसनीयता भी जुड़ी होती है। विशेषकर तब, जब मामला किसी जरूरतमंद परिवार के पेंशन एवं अन्य स्वत्वों के भुगतान से जुड़ी कथित रिश्वत मांगने की शिकायत का हो।
ऐसे में शासन और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि शिकायत, जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा और पदस्थापना आदेश के बीच की पूरी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें। शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार जवाबदेही भी तय की जाये।




