लगातार चार दिन से भारी बारिश… फिर भी नहीं डिगी आस्था, बप्पा की विदाई में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
भीगते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे श्रद्धालु, 54 साल पुरानी परंपरा के बीच भावुक हुई गणपति बप्पा की विदाई

AINS NEWS गरियाबंद… लगातार तीसरे दिन हो रही बारिश से जहां गरियाबंद जिले की नदी-नालियां उफान पर हैं और जनजीवन प्रभावित है, वहीं गणपति बप्पा की विदाई के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। शुक्रवार को भारी बारिश के बीच गरियाबंद नगर में गणेश प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा निकली। बारिश में भीगते हुए श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते और नाचते हुए छिंद तालाब पहुंचे। इस दौरान पूरा नगर भक्ति और उल्लास के रंग में डूबा नजर आया।

सुबह से ही गरियाबंद नगर में गणपति विसर्जन को लेकर उत्साह का माहौल रहा। जैसे-जैसे प्रतिमाएं शोभायात्रा के साथ आगे बढ़ीं, वैसे-वैसे सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। ढोल-ताशों की गूंज, गणपति बप्पा के जयकारे और गुलाल की बौछार के बीच बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भक्ति में झूमते नजर आए। लगातार बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग से गणेश प्रतिमाएं तिरंगा चौक, मस्जिदपारा, मेन रोड और पुराने बाजार से होते हुए छिंद तालाब पहुंचीं। रास्तेभर श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा की आरती की और जयकारे लगाए। कई स्थानों पर युवा मंडलों और सामाजिक संस्थाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।
‘गणपति बप्पा मोरया… अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से नगर की गलियां गूंजती रहीं। बारिश के बीच भी शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
छिंद तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती कर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। बप्पा को विदाई देते समय कई श्रद्धालुओं की आंखें नम भी नजर आईं।
54 वर्षों से चली आ रही सिन्हा परिवार की गणेश स्थापना परंपरा
पुराना मंगल बाजार स्थित सिन्हा परिवार के घर गणपति स्थापना इस वर्ष भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। परिवार द्वारा गणेशोत्सव मनाने की यह परंपरा 54 वर्षों से चली आ रही है। बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को आज भी परिवार की नई पीढ़ी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है।
पूरे 11 दिनों तक यहां प्रतिदिन गणपति बप्पा की आरती, मोदक प्रसाद वितरण और आकर्षक रोशनी से सजावट की गई। आसपास के लोग भी परिवार के गणेशोत्सव में शामिल होते रहे।
धरमीन बाई सिन्हा, बुद्धि देवी सिन्हा, लक्ष्मी सिन्हा, रेणुका सिन्हा, भारती सिन्हा, किरन सिन्हा, रचना केला, मोनिका सिन्हा और लीना वंदना सहित परिवार के सदस्यों ने विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ बप्पा को विदाई दी।

धरमीन बाई सिन्हा ने कहा—54 साल की परंपरा, हर साल बढ़ती आस्था
धरमीन बाई सिन्हा ने कहा कि उनके परिवार में गणपति स्थापना की परंपरा 54 वर्षों से चली आ रही है। बुजुर्गों ने जिस श्रद्धा के साथ इस परंपरा की शुरुआत की थी, उसे परिवार आज भी पूरी आस्था के साथ निभा रहा है। 11 दिनों तक घर में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण किया गया। बारिश के बावजूद विसर्जन के दौरान लोगों का उत्साह देखकर मन भावुक हो गया। बप्पा से यही प्रार्थना है कि सभी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे और अगले वर्ष वे फिर इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ पधारें।
दर्जनों पंडालों में पूजा, हवन और भंडारे
गरियाबंद नगर में स्थापित दर्जनभर से अधिक गणपति पंडालों में गणेशोत्सव के दौरान पूजा-अर्चना, हवन और भंडारे का आयोजन किया गया। कई स्थानों पर युवा मंडलों और सामाजिक संस्थाओं ने सांस्कृतिक झांकियां भी निकालीं। बाल गणेश की लीलाओं और भगवान गणेश से जुड़ी धार्मिक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।
पुलिस, नगर सेना और गोताखोर दल की मुस्तैदी
गणेश विसर्जन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन, नगर सेना, गोताखोर दल और नगर पालिका की टीम तैनात रही। नगर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर छिंद तालाब तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। पुलिसकर्मी और गोताखोर दल लगातार मौके पर मौजूद रहे, ताकि विसर्जन के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।

नगर पालिका ने संभाली सफाई और व्यवस्था की जिम्मेदारी
नगर पालिका की टीम ने विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ साफ-सफाई की व्यवस्था संभाली। नपा अधिकारी अश्वनी वर्मा ने बताया कि विसर्जन की प्रक्रिया लगातार जारी है और प्रतिमाओं को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विशेष ध्यान इस बात पर रखा जा रहा है कि पूजा सामग्री और हवन की अवशेष सामग्री सीधे तालाब में न जाए। इसके लिए अलग व्यवस्था की जा रही है, ताकि छिंद तालाब की स्वच्छता बनी रहे।
भक्ति के बीच भावुक हुई विदाई
जैसे-जैसे गणेश प्रतिमाएं विसर्जित होती गईं, छिंद तालाब का वातावरण भक्तिमय होता गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, आरती और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य को विदाई दी। भारी बारिश के बावजूद उमड़ी भीड़ ने यह संदेश दिया कि मौसम चाहे जितना प्रतिकूल हो, आस्था के सामने भक्तों का उत्साह कम नहीं होता।
बप्पा के जल में विलीन होते ही श्रद्धालुओं ने एक स्वर में जयकारा लगाया— ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।’
व्यवस्था में इनकी रही भूमिका
नगर पालिका की व्यवस्था में भूपेंद्र कश्यप, अश्वनी वर्मा, पुरुषोत्तम चंद्राकर, अजय ध्रुव, निर्मल यादव, विभीषण, छत्तर यादव, लोकेश साहू, परमेश्वर शहनी, शिवा शहनी सहित समस्त नगरपालिका टीम की भूमिका रही।
नगर सेना एवं पुलिस टीम में भेखराम गायकवाड़, विष्णु कुर्रे, गजानंद सोनवानी, योगेश ध्रुव, पार्वती और रेणुका सहित जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली।




