नक्सलियों का नया पत्र आया सामने, बिना शर्त शांति वार्ता की अपील
बीजापुर जिले में कर्रेगट्टा पहाड़ी पर पिछले कई दिनों से चल रहा ऑपरेशन कगार

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कर्रेगट्टा पहाड़ी पर पिछले कई दिनों से ऑपरेशन कगार चल रहा है, जिसे नक्सलियों के ख़िलाफ़ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन कहा जा रहा है। इस अभियान में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के 8 से 10 हज़ार सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। ख़बरों के मुताबिक़, नक्सलियों के बड़े नेता जैसे हिड़मा, देवा और विकास इस ऑपरेशन में घिरे हुए हैं। अब तक 5 से 6 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन कगार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभय का कहना है कि जनवरी 2024 से केंद्र और राज्य सरकारों ने इस ऑपरेशन के नाम पर सैकड़ों माओवादियों और निर्दोष आदिवासियों की हत्याएँ की हैं। उन्होंने इसे “संविधान का उल्लंघन” बताते हुए कहा, “भारत के संविधान में लोगों को जीने का अधिकार दिया गया है, लेकिन सरकारें इसे कुचल रही हैं।”
अभय ने पत्र में दावा किया कि देश-दुनिया के कई जनवादी, क्रांतिकारी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी इस ऑपरेशन के ख़िलाफ़ आंदोलनरत हैं। उनकी माँग है कि ऑपरेशन कगार को तुरंत रोका जाए और युद्धविराम की घोषणा की जाए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि माओवादियों के साथ मिलकर शांति वार्ता के ज़रिए इस समस्या का हल निकाला जाए।

अभय ने ऑपरेशन की आलोचना करते हुए कहा कि कर्रेगट्टा इलाके में 10 हज़ार से ज़्यादा पुलिस, अर्धसैनिक बल और कमांडो तैनात किए गए हैं। पिछले 3 दिनों में उनके 3 साथियों की हत्या की जा चुकी है, और नक्सली नेतृत्व को निशाना बनाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ़ आत्मसमर्पण की चेतावनी दे रही है, तो दूसरी तरफ़ हिंसा का रास्ता अपना रही है।
अभय ने कहा, “हमने अब तक कुल 3 पत्र जारी किए हैं। एक तरफ़ हम बिना शर्त वार्ता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ क्रांतिकारियों और आदिवासियों की हत्याएँ हो रही हैं। ऐसे में शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं रह जाता।”
अभय ने अपनी अपील में केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में एक समयसीमा के साथ युद्धविराम की घोषणा की जाए।
इससे पहले, उत्तर-पश्चिम सबजोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश ने भी एक पत्र जारी किया था। रूपेश ने ऑपरेशन कगार को तुरंत रोकने की माँग करते हुए कहा था कि बस्तर में बंदूक के दम पर शांति नहीं लाई जा सकती। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि एक तरफ़ बातचीत की बात होती है, तो दूसरी तरफ़ जंगलों में सैन्य अभियान चलाए जा रहे हैं। रूपेश ने भी शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने की माँग की थी।
इस पूरे मामले में सियासी हलचल भी तेज़ हो गई है। तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने भी ऑपरेशन कगार पर सवाल उठाए। 27 अप्रैल 2025 को बीआरएस की रजत जयंती समारोह में उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में ऑपरेशन कगार के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्याएँ हो रही हैं। मैं केंद्र सरकार से इस ऑपरेशन को बंद करने की अपील करता हूँ।
ऑपरेशन कगार को लेकर नक्सलियों का नया पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने हत्याओं का आरोप लगाते हुए शांति वार्ता की अपील की है। लेकिन सरकार का रुख़ सख़्त है, और ये अभियान जारी है।




