सेवानिवृत्ति से चार माह पहले कलेक्टर का स्थानांतरण, कार्यकाल और फैसले पर उठे सवाल
आदिवासी जिले में उल्लेखनीय कार्यों के बीच भगवान सिंह उइके का तबादला चर्चा में

AINS NEWS/जीवन एस साहू/गरियाबंद… जिले के कलेक्टर भगवान सिंह उइके के स्थानांतरण को लेकर प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति दिसंबर में प्रस्तावित है, ऐसे में सेवानिवृत्ति से महज कुछ माह पहले किए गए स्थानांतरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर तब, जब उनके कार्यकाल के दौरान किसी बड़ी शिकायत की जानकारी सामने नहीं आई और प्रशासनिक स्तर पर उनके कार्यों की सराहना होती रही।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके के कार्यकाल की एक खास बात उनकी नियमित प्रशासनिक उपस्थिति और क्षेत्र में सक्रियता रही। आदिवासी बहुल जिले में उन्होंने स्थानीय समुदायों से जुड़े कई मुद्दों पर पहल की। फिंगेश्वर विकासखंड की टेका ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कपसीडीह को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की दिशा में की गई पहल को भी स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी जिले में एक आदिवासी अधिकारी के रूप में भगवान सिंह उइके ने आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी और प्रशासन को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सेवानिवृत्ति में केवल कुछ माह शेष हैं, तबादले की आवश्यकता क्यों महसूस की गई? क्या ऐसे मामलों में प्रशासनिक निरंतरता को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए थी? स्थानांतरण के पीछे वास्तविक प्रशासनिक कारण क्या हैं, यह सरकार और संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
इसी संदर्भ में पूर्ववर्ती कार्यकाल का उदाहरण भी चर्चा में है। कांग्रेस शासन के दौरान छत्तर सिंह डेहरे को सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने इसी पद से सेवानिवृत्ति ली थी। वर्तमान मामले में परिस्थितियां अलग होने के कारण लोग दोनों घटनाओं की तुलना करते हुए प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के करीब तबादला—उपलब्धियों का सम्मान या प्रशासनिक आवश्यकता?
कलेक्टर भगवान सिंह उइके को लेकर स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अधिकारी का कार्यकाल संतोषजनक रहा हो और सेवानिवृत्ति में कुछ ही महीने बाकी हों, तो ऐसे समय में स्थानांतरण के निर्णय के पीछे स्पष्ट कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। वहीं सरकार की ओर से यदि स्थानांतरण के संबंध में कोई प्रशासनिक कारण है, तो उसे सामने रखे जाने से उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है।




