छत्तीसगढ़

कलेक्टर ने पेश की मानवता की मिसाल, कर्मचारियों की हड़ताल के बाबजूद ली पीड़िता की सुध

जिला मुख्यालय के जेल बाड़ी से कुछ दूर एक टीले के घर में नेत्रहीन महिला अपने नन्हे बालक के साथ रहती है। जो कि कुछ वर्षो पहले यहां से विवाह कर जा चुकी थी

दंतेवाड़ा।। जिला मुख्यालय के जेल बाड़ी से कुछ दूर एक टीले के घर में नेत्रहीन महिला अपने नन्हे बालक के साथ रहती है। जो कि कुछ वर्षो पहले यहां से विवाह कर जा चुकी थी। परन्तु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, उसने अपने पति को खो दिया। तो उसकी मां ने उसे और उसके बच्चो को अपने घर ले आई। जिस कारण उसकी कोई भी सरकारी पहचान नहीं बन पाई, साथ ही अशिक्षा के कारण और नेत्रहीनता के कारण वह जंगलों से लड़की बीनकर और उसे बेचकर जीवन यापन को मजबूर थी।

जब इस बात की खबर मीडिया मित्रो के साथ हमारी टीम ने जिला कलेक्टर विनीत नंदनवार को दी तो, कलेक्टर ने कर्मचारियों के हड़ताल में बैठे होने के बावजूद, उन कर्मचारियों को जिला कलेक्टर ने आदेश दिया और उन कर्मचारियों ने भी उस महिला के दर्द को समझकर उसे तत्काल राहत देने रात्रि को ही उसके घर पहुंच गए।

आपको हम बता दे की उस महिला का नाम मासे है जो कि नेत्रहीन होकर भी अपनी बूढ़ी मां और बच्चे को पाल रही थी। परन्तु अब जिला कलेक्टर ने उस महिला को समाज और सरकार कि मुख्य धारा से जोड़ने के लिए तत्काल प्रभाव से उसका मेडिकल सर्टिफिकेट, दिव्यांग पेंशन, दिव्यांग राशन कार्ड के साथ साथ उसे 20 हजार रुपए भी दिलवाए, जो राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना से लाभान्वित करवाई गई।

इन सभी सहायताओ कि प्राप्त कर महिला अत्यंत खुश हुई और उसने जिला कलेक्टर के साथ साथ उनकी टीम को नमन किया। जिला कलेक्टर और उनकी टीम के इस बेहतरीन त्वरित कार्यवाही से जिले वासी भी आश्वस्त हुए कि यह हड़ताल केवल सरकार के खिलाफ है ना कि जनता के और ये सभी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के पालन करने के लिए दिन और रात दोनों पहर अपने कार्यो के लिए अपने जिलाधीश के साथ खड़े है।

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