छत्तीसगढ़

छतीसगढ़ी भाखा में सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन, नियमितिकरण नहीं, जानकारी नहीं तो काम नहीं – काम बंद

33 जिलों में माननीय मुख्यमंत्री के नाम जिला स्तर में 45 हजार संविदा कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा।

AINS RAIPUR….छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले जिले के अलग अलग विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ी भाषा में तैयार कर पूरे 33 जिलों में माननीय मुख्यमंत्री के नाम जिला स्तर में 45 हजार संविदा कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा। साढ़े चार साल के लम्बे इंतजार के बाद भी बजट में उनकी मांगों को शामिल नहीं किए जाने एवम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 22 विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की जानकारी नहीं आने के वक्तव्य के बाद संविदा कर्मियों ने नियमितिकरण विषय पर सरकार की मंशा एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। जिसके कारण जिले एवम राज्य के संविदा कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

काम बंद करने की रणनीति
संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री कौशलेश तिवारी ने बताया कि प्रांतीय आह्वान पर जिले के संविदा कर्मचारी सोमवार को सामूहिक अवकाश में रहते हुए माननीय मुख्यमंत्री के नाम नियमितिकरण जल्द करने ज्ञापन सौंपा। विगत दिनों मुख्यमंत्री जी द्वारा मीडिया के समक्ष विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी नहीं दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद प्रांत स्तर से नियमितिकरण नहीं, जानकारी नहीं तो काम नहीं के तर्ज पर काम बंद करने की रणनीति बनाई गई है। जिसके तहत सोमवार कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लिया गया।

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त सिन्हा, अशोक कुर्रे और प्रदेश प्रवक्त सूरज सिंह ठाकुर एवं प्रदेश सचिव श्रीकान्त लास्कर ने कहा कि,यदि सरकार अपने घोषणा पत्र में किए हुए वादे पर गंभीरता नहीं दिखाती तो जल्द ही समस्त संविदा कर्मचारी बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी।

प्रदेश उपाध्यक्ष संजय सोनी,विजय यादव और संगठन मंत्री परमेश्वर कौशिक ने कहा कि, माननीय मंत्री जी द्वारा विभिन्न मीडिया माध्यमों में यह कहना कि संविदा कर्मचारियों की जानकारी अभी तक प्राप्त हुई है जिस कारण नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है यह बात गले नहीं उतरती कि, शासन द्वारा किसी भी संविदा कर्मचारियों की जानकारी प्राप्त करना कोई बड़ी बात नहीं है जबकि प्रदेश में 4 साल पश्चात भी यह कार्य नहीं किया गया इससे यह प्रतीत होता है कि, नियमितीकरण के मामले को सरकार जानबूझकर लटकाने का प्रयास कर रही है , इससे सभी संविदा कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है ।

 

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