छत्तीसगढ़

महात्मा गांधी की हत्या नाथुराम गोडसे ने की, इससे असहमत है शंकराचार्य, बोले – मेरे पास है सबूत

उन्होंने स्पष्ट कहा था जिस समय मैंने गांधी को मारने का विचार किया उस समय मैंने मान लिया कि मैं मर गया हूं

AINS NEWS…रायपुर…नाथुराम गोडसे को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच शंकराचार्य का बड़ा बयान सामने आया है। शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने गांधी की हत्या गोडसे ने की इस बात पर असहमति जताई है।

शंकराचार्य ने कहा – गांधीजी की हत्या की से मैं सहमत नहीं हूं लेकिन जो उनका वक्तव्य है वृंदावन में मेरे पास वह पुस्तक है, उस पुस्तक को पढ़ने के बाद आपका ह्रदय स्वीकार करेगा नाथूराम अत्यंत व्यथित थे, जो चाल चलन उस समय उनका था। उन्होंने कोर्ट में जो बयान दिया है वह पुस्तक प्रतिबंधित है लेकिन मेरे पास वृंदावन, पुरी में है। उनके वक्तव्य पढ़ने के बाद प्रभावित हुए बिना आप नहीं रह सकते। उनका पूरा ग्रंथ पढ़ लीजिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा था जिस समय मैंने गांधी को मारने का विचार किया उस समय मैंने मान लिया कि मैं मर गया हूं। उन्होंने स्वयं कहा था मैं मारा ही जाऊंगा। फांसी की सजा मिलेगी। गांधी को इसलिए मारा कि उस व्यक्ति की कूटनीति चल जाती, अत्यधिक समय तक जीवित रहते,इससे न भारत का अस्तित्व सिद्ध होता न आदर्श सिद्ध होता।

बता दे कि पुरी पीठाधीश्वर निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज राजधानी रायपुर पहुँचे हुए हैं जहां उन्होंने प्रेसवार्ता ली और विभिन्न मुद्दों में बातचीत की। छत्तीसगढ़ में हो रही धर्मांतरण पर सियासी बयानबाजी को लेकर महराज जी कहते हैं कि शासन तंत्र को दिशाहीनता के कारण हिंदुओं को धर्मांतरित किया जाता है। सेवा के नाम पर अल्पसंख्यक बनाने का अभियंत्र है। शासन केंद्र की हो या प्रांत की उसकी दिशाहीनता के कारण धर्म चूक करने वालों को दाल गलती है।

जातिगत समीकरण पर महराज कहते हैं कि गीता के पहले अध्याय का जो कटाक्ष करते है उन्हें ज्ञान नहीं है। जाति धर्म के स्वरूप को सवाल, Bप्रभाव को समझकर अनुपालन को आवश्यकता है। शिक्षा, सुरक्षा, अर्थ और सेवा के प्रकल्प सदा संतुलित रहे, जनसंख्या सदा संतुलित रहे। मातृशक्ति सुरक्षित रहे, वर्ण व्यवस्था और आर्थिक व्यवस्था संभव नहीं है।

 

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