छत्तीसगढ़

राज्य में कोनोकार्पस प्रजाति के नए पौधरोपण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध, नया पौधरोपण नहीं, न ही इसके रोपण को बढ़ावा

यह निर्णय पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत लिया गया

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में कोनोकार्पस प्रजाति के नए पौधरोपण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसका प्रकाशन 7 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में किया गया।

सरकार के अनुसार यह निर्णय पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत लिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि कोनोकार्पस एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है, जिससे स्थानीय जैव विविधता, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल संसाधनों और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
यह फैसला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित केंद्रीय सशक्त समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस के नए पौधरोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ पहले से लगे पौधों को चरणबद्ध तरीके से स्थानीय एवं देशी प्रजातियों से प्रतिस्थापित करने की अनुशंसा की थी।
नई अधिसूचना के तहत राज्य की सीमा में कोई भी व्यक्ति, स्थानीय निकाय, शासकीय या अर्द्धशासकीय संस्था, स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम अथवा अन्य संगठन अब कोनोकार्पस का नया पौधरोपण नहीं कर सकेंगे और न ही इसके रोपण को बढ़ावा देंगे।

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