उत्खनन में निकले शिवलिंग के संरक्षण और संवर्धन की मांग, भोंगापाल में स्थित पूर्वाभिमुख बुद्ध प्रतिमा के आसपास निकले थे यह शिवलिंग
विभाग के अनुमान के अनुसार इन मूर्तियों का निर्माण लगभग छठी सती ईस्वी में हुआ है

AINS NEWS 24X7 के .शशिधरण व राजमन नाग….. कोंडागांव जिले से 70 किलोमीटर दूर भोंगापाल गांव जो पूरी तरह पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है यहां ईंटों से निर्मित टीलों पर बुद्ध की विशाल प्रतिमा थी, जिसे डोकरा बाबा के नाम से स्थानीय लोग पूजते थे। सन 1990 – 91 में हुए उत्खनन कार्य में यह चैत्य गृह प्रकाश में आया था। इसके आसपास अन्य टीलों पर भी उत्खनन में दो शिवलिंग पुरातत्व विभाग को मिले, विभाग के अनुमान के अनुसार इन मूर्तियों का निर्माण लगभग छठी सती ईस्वी में हुआ है, यहां उत्खननित शिव मंदिर भी इसी स्मारक के समकालीन हैं। पुरातात्विक दृष्टि से यह स्मारक बेहद महत्वपूर्ण है। भगवान बुद्ध की प्रतिमा के ऊपर शेड का निर्माण किया जा चुका है लेकिन आसपास निकले शिवलिंग आज भी संरक्षण और संवर्धन की बाट जोह रहे हैं। बुद्ध संरक्षण समिति के सदस्यों ने उत्खनन में निकले शिवलिंग के संरक्षण और संवर्धन की मांग करते हुए चारों तरफ फेंसिंग कार्य की मांग की है। समिति के सदस्यों का कहना है कि भगवान बुद्ध के प्रतिमा के आसपास उत्खनन कार्य से निकले शिवलिंग भी जब उस प्रतिमा के समकालीन हैं तो इन शिवलिंग की भी देखरेख और संरक्षण पुरातत्व विभाग को प्रमुखता से करनी चाहिए।





